Sunday, 30 September 2018

किन्नर कैलाश यात्रा भाग -3 गुफा से दर्शन करके गणेश पार्क तक

              ||किन्नर कैलाश यात्रा ||
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सुबह अलार्म बजा तो आँख खुली फिर बब्बू को जगाया उठजा भाई ।बब्बू की एक खास बात है उसको दुबारा नही बोलना पड़ता एक बार मे ही उठ जाता है ।लेकिन जब बाहर टॉर्च मार कर  देखा तो बारिश हो रही थीं इस लिए हम दुबारा लेट गए ।हमारी वजह से धीरे धीरे और लोग भी जाग गए ।करीब 3:30 बारिश भी रुक गई तब तक तकरीबन सभी जाग गए थे मैं ओर बब्बू उठ कर गुफा से बाहर आ गए। हमने देहरादून वाली मैडम को भी जगा दिया ।तब तक नंगल और चंडीगढ़ वाले भी बाहर आ गए तो हम सभी ने भोले का जयकारा लगाया और आगे चल पड़े ।अभी 4 भी नही बजे थे हम सोच रहे थे अगर सब कुछ सही रहा तो हम आज दर्शन के बाद नीचे भी जा सकते है चलो देखते है क्या होता है । ठंडी हवा चल रही थी रात को बारिश हुई थी इस लिए भी ठंड ज्यादा लग रही थी ।आज सबसे आगे मैं चल रहा था मेरे साथ ही बब्बू था बाकी सब पीछे आ रहे थे ।

शुरू मे रास्ता ठीक है चड़ाई है पर रास्ता अच्छा बना हुआ है ।कल 12 बजे से आराम कर रहे थे इस लिए आज ज्यादा मुश्किल नही आ रही थी चलने में ।एक तो अंधेरा था ऊपर से धुन्ध भी हो गयी थी इस लिए थोड़ी बहुत मुश्किल आ रही थी पर इस के लिए हम तैयारी करके आए थे टॉर्च थी हमारे पास पर देहरादून वाली मैडम के पास टॉर्च नही थी उनको मैंने अपना मोबाईल दे दिया फ़्लैश लाइट जला कर ।पहले एक घण्टे तक हम ज्यादा नही रुके लगातार चलते रहे बीच मे 10 सेकेंड के लिए रुकते थे ज्यादा से ज्यादा ।अब हल्का सा उजाला भी होने लगा था जिस से चलने में आसानी होने लगी ।थोड़ी देर बाद हम एक जगह बैठ गए तब तक बाकी लोग भी आ गए ।कुछ देर आराम करने के  बाद हम फिर चल पड़े नंगल वालो की हालत खराब हो रही थी अब वो काफी पीछे रह जाते थे आज तो डॉक्टर साहिब भी कुछ कमजोर लग रहे थे ।थोड़ी थकावट तो हमे भी होने लगी थी  ।थोड़ी देर बाद बब्बू बोला भाई रुक जा थोड़ी देर आराम करते हैं हम एक पत्थर पर बैठ गए थोड़ी देर बाद बाकी लोग भी आ गए 5 मिनेट बाद मैंने बब्बू को कहा चले तो बब्बू बोला थोड़ी देर और रुको तभी बब्बू ने उल्टी कर दी मैंने उसे पानी पिलाया कुछ देर आराम किया फिर बब्बू से पूछा भाई ठीक हो अब कोई प्रॉब्लम तो नही वो बोला ठीक हूँ चलो आगे चलते है तो मैं बब्बू ,देहरादून वाली मैडम और शिमला वाला लड़का आगे बढ़ने लगे। नंगल वाले बोले आप चलो हम आते है ।अभी हम चार लोग ही चल रहे थे चंडीगढ़ वाले हमे काफी पीछे आते हुए दिख रहे थे।अब मौसम साफ हो गया था सूरज भी निकल आया था सूरज की रोशनी से बर्फ से लदे पहाड़ सोने की तरह चमक रहे थे बादल नीचे और हम ऊपर थे मानो हम बादलो के ऊपर ही चल रहे हो ऐसे नजारे देख कर सारी थकावट दूर हो गईं ।अब बब्बू भी काफी अच्छा महसूस कर रहा था ।ठण्ड बहुत ज्यादा लग रही थी हवा भी काफी चल रही थी कुछ हम रुक रुक कर चल रहे थे इस लिए भी शरीर गर्म नही हो रहे थे ऊपर से कुछ खाया भी नही था ।बब्बू को उल्टी आने के कारण जो पेट मे था वो भी निकल गया था इस लिए अब उसे भूख भी लग रही थी तो हमने सोचा जो बिस्किट है हमारे पास वो खा लेते है तो बब्बू बोला थोड़ा और रुक जाते है फिर खाएंगे ।अब रास्ता भी पत्थरो वाला आ गया था इस लिए हम थोड़ा सम्बल कर ही चल रहे थे।कुछ समय बाद हमने सोचा नंगल वालो को भी आ जाने दो फिर चलेगे ओर हम सभी रुक गए ।कुछ देर बाद कुछ यात्री हमारे पास आए ये सभी केरल से थे और पहली बार यात्रा कर रहे थे ये भी रात को गुफा के पास ही रुके थे ।हमने इनसे पूछा हमारे कुछ साथी पीछे थे वो मिले थे आप को तो उन्होंने बताया वो तो वापिस लौट गए  हम बहुत हैरान हुए वापिस क्यू चले गए जब हम उनके पास से आये थे तो वो ठीक लग रहे थे ऐसा कुछ लगा नही था कि वो वापिस लौट जाएंगे । चलो भोले को जो मंजूर है होना वही है ।थोड़ी देर बाद चंडीगढ़ वाले लड़के भी आ गए और जो गुफा में हमे जालंधर वाले मिले थे उनके कुछ साथी भी आ गए थे ।

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अब हमने एक फैसला किया कि अब हम सभी इकठे रहेंगे कोई अलग नही होगा सभी साथ मे दर्शन करेगे । थोड़ी देर बाद हम आगे बढ़ने लगे अब हम सभी साथ में ही चल रहे थे। माहौल भी अच्छा बन गया था हम सभी एक दूसरे से मजाक करते हुए चल रहे थे । गुफा से पार्बती कुण्ड तक रास्ता ज्यादा मुश्किल नही लगा इसका एक कारण हमारा आराम से चलना भी था हमने अब तक कोई जल्दबाजी नही की थी हमारा एक ही लक्ष्य था किन्नर कैलाश शिला के दर्शन करना इसके लिए चाहे जितना भी समय लग जाए जल्दबाजी नही करनी ।थोड़ी देर चलने के बात हम पार्वती कुण्ड पहुंच गए ।अब भूख भी बहुत लग रही थी तो सोचा कुछ खा लेते है तो सभी एक जगह बैठ गए और हमने अपना शाही भोजन निकाला हमारे पास 2 पैकेट गुड्डे बिस्किट थे वही निपटा दिए ।अब पानी भी था पार्वती कुण्ड से बोतल भर ली थी ।तभी चंडीगड़ वाले एक लड़के ने हमे कुछ मेवा दिया इसे खा कर भूख से काफी आराम मिला ।आसमान में बादल आने लगे थे हवा भी तेज हो गई थी ।इस लिए हम ज्यादा देर यहां नही रुके ।पार्वती कुंड में हाथ मुँह धोए पानी इतना ठंडा था कि हाथ सुन्न हो गए ।जो पानी की बोतल यहां से भरी थी वो भी नही पकड़ी जा रही थी ।मैंने बोतल अपने बैग के अंदर रख ली सोचा कुछ तो गर्म होगा पानी नही बाहर तो शायद जम ही जायेगा ।पार्वती कुण्ड से हम शॉर्टकट के चक्कर मे गलत रास्ते चढ़ने लगे इसमे बड़े बड़े पत्थर थे उनपर बड़ी मुश्किल से पक्कड़ पक्कड़ कर चड़ना पड़ा। पत्थरो को जब पकड़ते थे तो हाथ और भी सुन्न हो जाते थे ।जो शिमला वाला लड़का था वो सभी को पक्कड़ पक्कड़ कर खीचने लगा सबसे पहले वो चड़ जाता फिर सभी को बताता यहाँ से आओ। देहरादून वाली मैडम को काफी मुश्किल हो रही थी उनको वो लड़का पूरे रास्ते पक्कड़ कर लेकर गया ।वैसे तो पार्वती कुण्ड से पहले की रास्ता पत्थरो  वाला मिलने लगता है पर पार्वती कुण्ड के बाद तो पत्थर काफी मुश्किल  पैदा करते है ।अब सभी लोग साथ मे ही चल रहे थे एक दो बार तो ऐसी जगह आयी जहाँ हमे लगा आगे रास्ता है ही नही पर फिर किसी बड़े पत्थर पर चढ़ कर देखते सही रास्ता किधर है ।एक बार तो मैं गलत रास्ते चला गया बाकी सब आगे निकल गए गलत रास्ते पर जाने का एक फायदा जरूर हुआ मुझे एक ब्रह्म कमल मिल गया मैंने ब्रह्म कमल पहली बार देखा था और इसे तोड़ लिया चलो भोले को अर्पित कर दूंगा ।तभी बब्बू ने आवाज लगाई उधर से आ जाओ वो रास्ता आसान है तो मैं उस के बताए रास्ते से आगे बढ़ने लगा ।थोड़ी देर बाद एकदम सीधी चड़ाई आ गयी अरे इसपर कैसे चड़ेगे चल भाई शिमला वाले तू चड़ कर दिखा हम सभी तेरे पीछे पीछे आएंगे वो तो पक्का पहाड़ी था एक मिनट में चढ़ गया चड़ तो हम भी गए पर हमें समय थोड़ा ज्यादा लगा और गला सूखने लगा तो सभी ने थोड़ा थोड़ा पानी पिया थोड़ा पानी इस लिए पिया क्योके पानी इतना ठंडा था कि एक घूंट भी मुश्किल से पिया ।थोड़ी देर बाद एक  गुफा की तरह रास्ता मिला अब आगे इसी छेद से जा सकते थे तो पहले अपने पहाड़ी बन्दू गए फिर सभी बारी बारी उसमे से निकले ।

अब तक पीछे से ओर भी कई यात्री आ गए थे ।सभी जालंधर वाले और भी कई लोग थे ।उस पत्थरों के छेद से निकलने के बाद हम फिर कुछ समय के लिए रुक गए ।थोड़ा आराम किया फिर चल दिये आगे ।

जितना इस चड़ाई से डर लग रहा था उस से भी ज्यादा मौसम हमे डरा रहा था कभी कभी तो लगता था कि अब तो  बारिश पक्का शुरू होगी एकदम काले बादल आ जाते थे ।हवा भी काफी तेज और ठण्डी चल रही थी। कुछ देर बाद फिर एकदम सीधी चड़ाई ओर बड़े बड़े पत्थर इसे भी जैसे तैसे चढ़ ही गए। अब हम समुन्द्र तल से 16000 से ज्यादा ऊपर होंगे जिस वजह से ऑक्सीजन की कमी थी और इस कारण से हमारी सांस भी फूल रही थी ।सर में भी हल्का सा भारीपन आ गया था।इन पथरो पर डंडे को पक्कड़ कर चलना बहुत मुश्किल लग रहा था तो हमने एक जगह बड़े से पत्थर पर अपने पिठु बैग और डंडे रख दिए अब वापसी पर इन्हें उठा लेंगे ।अब हम ऐसी जगह पर आ गए थे जिस से हमे दूसरी तरफ दूर जंगल दिखाई देने लगा आज काफी देर से हम इस पत्थरो के जंगल मे चल रहे थे हरयाली हमे काफी समय के बाद दिखी चाहे ये हरयाली हमसे काफी दूर थी  पर फिर भी अच्छा लगा ।हमारे में से कोई भी पहले यहां नही आया था इस कारण हम किसी से ये भी नही पूछ सकते थे शिला अब कितनी दूर है ।

 
अब मैं एकदम चुप चाप सा चलने लगा था मन मे पता नही क्या अजीब सा महसूस हो रहा था मानो मैं इस दुनिया में ही नही हूँ ना कोई डर ना कोई फिक्र बस कोई शक्ति थी जिस ने मुझे अपने वश में कर लिया था ।मैंने आज तक ऐसा कभी महसूस नही किया था शायद भोले बाबा की शक्ति थी ।वैसे इस यात्रा पर आने से पहले मेरे साथ कुछ ऐसा हो गया था जिस कारण मैं भोले बाबा से बहुत ज्यादा नाराज हो गया था ।पहले तो मैंने इस यात्रा पर आना ही कैंसिल कर दिया था पर फिर मैंने  भोले को मन मे ही बोल दिया था मैं आप के पास जरूर आऊंगा  अगर आप मे शक्ति है तो मुझे रोक लेना ,मैं आऊंगा जरूर पर शिला की पूजा नही करूँगा आप भी अपना पूरा जोर लगा लेना पर आप मुझे हरा नही पाएँगे ।कभी कभी हम पता नही क्या क्या सोचने लगते हैं और बाद में इन्ही बातो पर हँसी भी आती है ।थोड़ी देर बाद जब हम शिला के बिकुल सामने पहुंचे मैं रोने लगा बब्बू ने पूछा क्या हुआ भाई पर मुझे कोई होश ही  नही था मैं रोता रहा कुछ देर बाद जब सभी लोग जोर जोर से जैकारे लगाने लगे तो मुझे होश आया मैंने अपने जूते उतारे रेनकोट पहन रखा था उसे भी उतारा और मोबाइल निकाला नेटवर्क नही था ।घर पर बोल कर आया था अगर नेटवर्क हुआ तो वीडियो कॉल करूँगा पर हवा तेज चल रही थी शायद इस लिए रेंज नही आ रही थी ।पर थोड़ी देर में ही मौसम भी साफ हो गया  धूप भी निकल आई पर नेटवर्क नही आया।पहले कुछ देर बैठ कर आराम किया सभी ने । फिर सभी वीडियो बनाने लगे जब शिला को माथा टेकने की बारी आई तो सब से पहले मैं ही खड़ा हुआ जब के मैं भोले  को बोल कर आया था मैं माथा नही टेकूँगा पर मैं हार गया मैं भूल ही गया था कि मैं तो भोले से नाराज हूँ सबसे पहले मैं खड़ा हुआ साथ ही बब्बू भी आ गया ।
शिला के पास जाने के लिए एकदम पतला सा रास्ता है एक तरफ हजारो फुट गहरी खाई है और दूसरी तरफ कुछ फुट नीचे पत्थर ही पत्थर है अगर किसी भी ओर गिरे तो मौत पक्की है ।हम दोनों बड़े ध्यान से शिला के पास पहुंचे जैसी भी हमको पूजा करनी आती थी अपनी तरफ से की ओर वापिस पीछे आ कर बैठ गए। हमारे बाद सभी ने बारी बारी से पूजा की ।शिमला वाला लड़का काफी पूजा पाठ जानता था उस ने आरती और शिव चालीस पड़ी। जिस दिन हम ने दर्शन किये थे उस दिन मंगलवार था तो हनुमान चालीसा का पाठ भी किया ।जब  हम बैठे थे तो मैं फिर भावुक हो गया और फिर रोने लगा सोच रहा था मैं कितना पागल हूँ भोले बाबा को चैलेंज करने लगा था कि मैं आप तक पहुँचूँगा पर माथा नही टेकूँगा पर जब यहाँ पहुँचा तो माथा भी सबसे पहले टेका ओर अब रो भी रहा हूँ ।ये हम भोले के ही भगत है जो ऐसा कर सकते है वरना ओर कौनसे धर्म मे कोई अपने भगवान से ऐसे बोल सकता  है ।एक भोले बाबा ही है जो हम जैसे राक्षस प्रविर्ती के लोगो को भी अपना बच्चा समझ कर अपना लेते है। आप यकीन नही करोगे ये सब बातें लिखते हुए भी मेरी आँखों मे आंसू है।
चलो बहुत हुई ये बाते अब यात्रा पर वापिस आते है  अब तकरीबन हमे एक घंटा हो गया था हमे यहाँ रुके हुए तो हम सभी भोले से विदा लेकर वापिस चलने लगे ।इस चड़ाई को चढ़ने में बहुत मुश्किल होती है पर उतरना तो और भी ज्यादा मुश्किल है ।मुझे तो वैसे भी उतरना ज्यादा मुश्किल लगता है ।इस ट्रैक पर एक मुश्किल ये थी कि जिन पथरो पर हम पथरो को पक्कड़ पक्कड़ कर चड़ जाते है उतरते हुए जा तो लटकना पड़ता है जा कूदना पड़ेगा पकड़ते है तो कभी बैग कहीं फस जाता है तो कहीं कपड़े घिस जाते है। और कूदने से आप को झटके काफी लगते है जिस से आप थक जाते है।पर जब यहाँ आये है तो इन मुश्किलो का सामना तो करना ही पड़ेगा ।वापसी पर मैं सब से आगे चल रहा था वैसे वापसी पर मैं सब से पीछे होता हूँ इस बार आगे था।मैं तेजी से उतर रहा था मुझे पता था अब अगर मैं जहाँ बैठ गया तो शरीर ठंडा हो जाएगा जिस वजह से चलने में मुश्किल होगी ।वापसी पर उस गुफा जैसे छेद को पार करने तक हम सब साथ ही थे उसके बाद सब आराम करने लगे पर मैं आगे चलता रहा ।मैं पार्वती कुण्ड तक लगातार चलता रहा यहां पर मैं एक काफी बड़े पत्थर पर बैठ गया ।थोड़ी देर बाद बब्बू ओर शिमला वाला लड़का भी आ गया । मैं पार्वती कुण्ड में से पानी लेने के लिए गया तो पानी भरते हुए मुझे अजीब सी स्मेल आयी तो मेरा मूड एकदम से बदल गया। मैं बब्बू के पास आकर बैठ गया तो लगा मुझे उल्टी आएगी तो बब्बू ने बोला साइड में जाकर उल्टी करले नही तो पूरे रास्ते दिक्कत होगी ।मैंने साइड में जाकर उल्टी की सर दर्द करने लगा था ।थोड़ी देर आराम करने के बाद हम खड़े हुए और नीचे उतरने लगे उल्टी के बाद शरीर काफी कमजोरी महसूस करने लगा था ।हम तीनों चल रहे थे काफी समय के बाद मैंने बब्बू को कहा यार कोई वापिस आता हुआ क्यों नही दिख रहा तो बब्बू बोला धीरे धीरे आ रहे होंगे। पर फिर कुछ समय बाद मैंने कहा यार हम इस रास्ते से नही आए थे ये रास्ता अलग है ।पर रास्ते मे कहीं कहीं हमे निशान लगे हुए दिख रहे थे तो मुझे लगा शायद सुबह मैंने ज्यादा ध्यान नहीं दिया होगा पर एक घंटे बाद शिमला वाला लड़का बोला हम दूसरे रास्ते पर आ गए हैं पर कोई बात नही इस पर निशान है हम गुफा तक पहुंच जाएंगे ।मुझे अब काफी थकावट महसूस हो रही थी चलने का बिल्कुल भी दिल नही कर रहा था। बब्बू ओर शिमला वाला लड़का आगे आगे चल रहे थे मै पीछे पीछे चल रहा था।करीब दो घंटे के बाद ये पत्थर कम हुए अब मिट्टी वाले पहाड़ आ गए ।पर मेरी हालत में कोई फर्क नही था।
इस रास्ते पर हम पिछले काफी समय से चल रहे थे पर  हमे कोई भी यात्री नजर नही आ रहा था ।वैसे इस जगह रास्ता भटकने का डर नही था क्योंकि वापसी पर हम उस नाले  को देख रहे थे जो गुफा से थोड़ा पहले मिलता है इसके साथ साथ चल कर हम वहाँ तक तो पहुंच ही जायेंगे ।।अब काफी देर बाद मुझे कोई नीचे उतरता हुआ दिखाई दिया वो काफी तेजी से उतर रहा था थोड़ी देर में ही वो मेरे पास पहुंच गया उसको देखकर मैं सिर्फ मुस्कुराया बोलने की हिम्मत नही थी उसने पूछा भी भाई ठीक हो मैंने सिर्फ हाँ में सिर हिलाया ।थोड़ी देर वो मेरे साथ साथ चला फिर आगे निकल गया ।अब बब्बू ने मुझे आवाज लगा कर कहा भाई वो देखो गुफा आने वाली हैं जल्दी चलो मैंने भी थोड़ी हिम्मत दिखाई और थोड़ा तेज चलने लगा ।कुछ देर बाद हम गुफा में थे ।यहां आकर हम बैठ गए काफी यात्री नीचे से आ गए थे सभी हरियाणा से थे ।सभी ने हमसे पूछा दर्शन हो गए और आप सुबह आप कितने बजे यहाँ से निकले थे हमने  उनको सब कुछ बताया आगे रास्ता कैसा है आप सुबह कितने बजे निकले और क्या करे ।15-20 मिनेट आराम के बाद हमारी थकावट काफी दूर हो गयी ।वहाँ पर एक यात्री ने हमे एक बिस्किट का पैकेट दिया जिसे खा कर भूख से भी कुछ राहत मिली तब तक देहरादून वाली मैडम भी आ गई थी उन्होंने बताया बाकी लोग अभी काफी पीछे है ।अब हम काफी फ्रेश महसूस कर रहे थे और समय भी अभी 4 ही बजे थे तो बब्बू बोला आगे चले तो मैंने हाँ बोल दी तो देहरादून वाली मैडम बोली मैं भी चलूंगी थोडी देर रुक जाओ तो हम कुछ समय और रुक गए 20 मिनेट बाद हम फिर नीचे की ओर चल दिए। कल जब हम ने ग्लेशियर पार किया था तो इसमें बर्फ काफी थी पर आज तो बर्फ काफी कम हो गईं थी इसे पार करने के लिए हमे काफी ऊपर पहाड़ पर चड़ना पड़ा जब हम इसे पार कर रहे थे तो धुन्ध काफी हो गईं थी जिस वजह से हमने डरते डरते ही पार किया । इसे पार करने के बाद इसमें से फिर पानी की बोतल भरी और आगे चल पड़े। इसके बाद हमे चड़ाई मिली मुझे तो बहुत अच्छा लगा चड़ाई देख कर उतरने के नाम पर मुझे बहुत डर लगता है ।जब हम चड़ रहे थे तो हमे कुछ आर्मी के लोग आते हुए मिले पूछने पर इन्होंने बताया इस बार सरकार ने आर्मी को यात्रा की जिमेवारी दी है वो ऊपर रह कर मेडिकल की सुविधा देंगे ता के यात्रियों को ज्यादा मुश्किल न हो ये सुविधा भी पहली बार ही मिल रही हैं ।जैसे जैसे इस यात्रा पर लोग ज्यादा जाने लगेंगे सुविधा भी ज्यादा मिलने लगेगी ।हमारे थोड़ा सा आगे जाते ही चड़ाई भी खत्म हो गई अब फिर से उतरना पड़ेगा ।हम तीनों आराम से उतरते रहे ।काफी समय बाद हमे गणेश पार्क दिखने लगा तो बब्बू बोला जल्दी करो नही तो हमे जगह नही मिलेगी रात को रहने के लिए। मैं बोला तुम जल्दी से जाकर कुछ देख लो रहने के लिए मैं आता हूँ आराम से बब्बू की स्पीड चढ़ते समय और उतरते समय एक जैसी ही रहती है मैं चड़ तो आराम से जाता हूँ उतरते समय थोड़ी दिक्कत होती है ।वैसे आज भोले बाबा की हम पर पूरी कृपा रही के बारिश नही हुई जबके पूरा दिन बादल छाय रहे सारा दिन हम डरते रहे के अब बारिश होगी एक बार तो इतने बादल आ गए थे कि कोई भी नही कह सकता था कि अब बारिश नही होगी पर फिर तेज हवा के कारण बादल चले गए थे ।थोड़ी देर बाद जब मैं गणेश पार्क पहुंचा तो बब्बू वहाँ बैठा था ।मैंने पूछा क्या हुआ मिली जगह तो वो बोला नही यार कोई भी टेंट खाली नही है सब अपने टेंट नीचे से लेकर आए हैं और फोरेस्ट हाउस वालो का कमरा भी फुल हो गया है ।जब मैं कमरे के अंदर गया तो एकदम से बाहर आ गया अन्दर भोले के कुछ भक्त चिलम फूंक रहे थे पूरा कमरा धुंए से भरा पड़ा था और मैं इस धुंए में एक मिनेट भी नही रह सकता।मैं भी वापिस आकर बब्बू के पास बैठ गया ।देहरादून वाली मैडम तो आज फिर किसी ग्रुप के पास चली गयी जिस में कुछ औरते थी उन्हें वहाँ रुकने की जगह मिल गई थी। थोड़ी देर बाद मैंने एक पोटर को बोला यार कोई रुकने का प्रबन्द कर दो तो वो बोला कोई भी टेंट खाली नही है फिर मैंने बोला यार तू पैसे बोल कितने चाहिए तो वो बोला मैं कुछ करता हूँ आप रुको ।10 मिनेट बाद वो हमारे पास आया ओर 500 में हमे एक टेंट लगा कर दे दिया। अब बारी थी खाने की तो हमने उन्हें कहा भाई अब कुछ खिला दो उस ने पता भी किया पर कुछ मिला नही तो हम ऐसे ही सोने की तैयारी करने लगे। काफी थक गए थे आज सुबह 4 बजे से चल रहे थे और अब 7 बज रहे है । जब टेंट में गए तो नीचे जगह समतल नही थी कुछ चुभ रहा था तो एक कम्बल ओर नीचे बिछाया पर कोई ज्यादा फर्क नही पड़ा ।अब हमने अपने घर पर फ़ोन किया घर वाले भी खुश थे कि हमे दर्शन हो गए घर पर बात करने के बाद हम सो गए  ।।

आज के लिए बस इतना ही अगले भाग में आप को बतायेगे कैसे हम नीचे उतरे और फिर सांगला वैली घूमे ।



2 comments:

  1. बहुत बढ़िया लिखा है रुपिंदर भाई।

    उल्टी लगी आप दोनों को और उसके बाद भी आप सकुशल यात्रा पूरी कर पाए, आपकी हिम्मत का प्रमाण देता है।

    चित्रों की कमी खल रही है। वो ज्यादा होने चाहिए।

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    1. धन्यवाद अक्षय भाई बाकी फ़ोटो तो मेरे पास पिछली सभी यात्राओ की कम है आगे जो भी यात्रा होगी ज्यादा से ज्यादा फ़ोटो खिचुंग

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