Sunday, 30 September 2018

किन्नर कैलाश यात्रा भाग -3 गुफा से दर्शन करके गणेश पार्क तक

              ||किन्नर कैलाश यात्रा ||
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सुबह अलार्म बजा तो आँख खुली फिर बब्बू को जगाया उठजा भाई ।बब्बू की एक खास बात है उसको दुबारा नही बोलना पड़ता एक बार मे ही उठ जाता है ।लेकिन जब बाहर टॉर्च मार कर  देखा तो बारिश हो रही थीं इस लिए हम दुबारा लेट गए ।हमारी वजह से धीरे धीरे और लोग भी जाग गए ।करीब 3:30 बारिश भी रुक गई तब तक तकरीबन सभी जाग गए थे मैं ओर बब्बू उठ कर गुफा से बाहर आ गए। हमने देहरादून वाली मैडम को भी जगा दिया ।तब तक नंगल और चंडीगढ़ वाले भी बाहर आ गए तो हम सभी ने भोले का जयकारा लगाया और आगे चल पड़े ।अभी 4 भी नही बजे थे हम सोच रहे थे अगर सब कुछ सही रहा तो हम आज दर्शन के बाद नीचे भी जा सकते है चलो देखते है क्या होता है । ठंडी हवा चल रही थी रात को बारिश हुई थी इस लिए भी ठंड ज्यादा लग रही थी ।आज सबसे आगे मैं चल रहा था मेरे साथ ही बब्बू था बाकी सब पीछे आ रहे थे ।

शुरू मे रास्ता ठीक है चड़ाई है पर रास्ता अच्छा बना हुआ है ।कल 12 बजे से आराम कर रहे थे इस लिए आज ज्यादा मुश्किल नही आ रही थी चलने में ।एक तो अंधेरा था ऊपर से धुन्ध भी हो गयी थी इस लिए थोड़ी बहुत मुश्किल आ रही थी पर इस के लिए हम तैयारी करके आए थे टॉर्च थी हमारे पास पर देहरादून वाली मैडम के पास टॉर्च नही थी उनको मैंने अपना मोबाईल दे दिया फ़्लैश लाइट जला कर ।पहले एक घण्टे तक हम ज्यादा नही रुके लगातार चलते रहे बीच मे 10 सेकेंड के लिए रुकते थे ज्यादा से ज्यादा ।अब हल्का सा उजाला भी होने लगा था जिस से चलने में आसानी होने लगी ।थोड़ी देर बाद हम एक जगह बैठ गए तब तक बाकी लोग भी आ गए ।कुछ देर आराम करने के  बाद हम फिर चल पड़े नंगल वालो की हालत खराब हो रही थी अब वो काफी पीछे रह जाते थे आज तो डॉक्टर साहिब भी कुछ कमजोर लग रहे थे ।थोड़ी थकावट तो हमे भी होने लगी थी  ।थोड़ी देर बाद बब्बू बोला भाई रुक जा थोड़ी देर आराम करते हैं हम एक पत्थर पर बैठ गए थोड़ी देर बाद बाकी लोग भी आ गए 5 मिनेट बाद मैंने बब्बू को कहा चले तो बब्बू बोला थोड़ी देर और रुको तभी बब्बू ने उल्टी कर दी मैंने उसे पानी पिलाया कुछ देर आराम किया फिर बब्बू से पूछा भाई ठीक हो अब कोई प्रॉब्लम तो नही वो बोला ठीक हूँ चलो आगे चलते है तो मैं बब्बू ,देहरादून वाली मैडम और शिमला वाला लड़का आगे बढ़ने लगे। नंगल वाले बोले आप चलो हम आते है ।अभी हम चार लोग ही चल रहे थे चंडीगढ़ वाले हमे काफी पीछे आते हुए दिख रहे थे।अब मौसम साफ हो गया था सूरज भी निकल आया था सूरज की रोशनी से बर्फ से लदे पहाड़ सोने की तरह चमक रहे थे बादल नीचे और हम ऊपर थे मानो हम बादलो के ऊपर ही चल रहे हो ऐसे नजारे देख कर सारी थकावट दूर हो गईं ।अब बब्बू भी काफी अच्छा महसूस कर रहा था ।ठण्ड बहुत ज्यादा लग रही थी हवा भी काफी चल रही थी कुछ हम रुक रुक कर चल रहे थे इस लिए भी शरीर गर्म नही हो रहे थे ऊपर से कुछ खाया भी नही था ।बब्बू को उल्टी आने के कारण जो पेट मे था वो भी निकल गया था इस लिए अब उसे भूख भी लग रही थी तो हमने सोचा जो बिस्किट है हमारे पास वो खा लेते है तो बब्बू बोला थोड़ा और रुक जाते है फिर खाएंगे ।अब रास्ता भी पत्थरो वाला आ गया था इस लिए हम थोड़ा सम्बल कर ही चल रहे थे।कुछ समय बाद हमने सोचा नंगल वालो को भी आ जाने दो फिर चलेगे ओर हम सभी रुक गए ।कुछ देर बाद कुछ यात्री हमारे पास आए ये सभी केरल से थे और पहली बार यात्रा कर रहे थे ये भी रात को गुफा के पास ही रुके थे ।हमने इनसे पूछा हमारे कुछ साथी पीछे थे वो मिले थे आप को तो उन्होंने बताया वो तो वापिस लौट गए  हम बहुत हैरान हुए वापिस क्यू चले गए जब हम उनके पास से आये थे तो वो ठीक लग रहे थे ऐसा कुछ लगा नही था कि वो वापिस लौट जाएंगे । चलो भोले को जो मंजूर है होना वही है ।थोड़ी देर बाद चंडीगढ़ वाले लड़के भी आ गए और जो गुफा में हमे जालंधर वाले मिले थे उनके कुछ साथी भी आ गए थे ।

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अब हमने एक फैसला किया कि अब हम सभी इकठे रहेंगे कोई अलग नही होगा सभी साथ मे दर्शन करेगे । थोड़ी देर बाद हम आगे बढ़ने लगे अब हम सभी साथ में ही चल रहे थे। माहौल भी अच्छा बन गया था हम सभी एक दूसरे से मजाक करते हुए चल रहे थे । गुफा से पार्बती कुण्ड तक रास्ता ज्यादा मुश्किल नही लगा इसका एक कारण हमारा आराम से चलना भी था हमने अब तक कोई जल्दबाजी नही की थी हमारा एक ही लक्ष्य था किन्नर कैलाश शिला के दर्शन करना इसके लिए चाहे जितना भी समय लग जाए जल्दबाजी नही करनी ।थोड़ी देर चलने के बात हम पार्वती कुण्ड पहुंच गए ।अब भूख भी बहुत लग रही थी तो सोचा कुछ खा लेते है तो सभी एक जगह बैठ गए और हमने अपना शाही भोजन निकाला हमारे पास 2 पैकेट गुड्डे बिस्किट थे वही निपटा दिए ।अब पानी भी था पार्वती कुण्ड से बोतल भर ली थी ।तभी चंडीगड़ वाले एक लड़के ने हमे कुछ मेवा दिया इसे खा कर भूख से काफी आराम मिला ।आसमान में बादल आने लगे थे हवा भी तेज हो गई थी ।इस लिए हम ज्यादा देर यहां नही रुके ।पार्वती कुंड में हाथ मुँह धोए पानी इतना ठंडा था कि हाथ सुन्न हो गए ।जो पानी की बोतल यहां से भरी थी वो भी नही पकड़ी जा रही थी ।मैंने बोतल अपने बैग के अंदर रख ली सोचा कुछ तो गर्म होगा पानी नही बाहर तो शायद जम ही जायेगा ।पार्वती कुण्ड से हम शॉर्टकट के चक्कर मे गलत रास्ते चढ़ने लगे इसमे बड़े बड़े पत्थर थे उनपर बड़ी मुश्किल से पक्कड़ पक्कड़ कर चड़ना पड़ा। पत्थरो को जब पकड़ते थे तो हाथ और भी सुन्न हो जाते थे ।जो शिमला वाला लड़का था वो सभी को पक्कड़ पक्कड़ कर खीचने लगा सबसे पहले वो चड़ जाता फिर सभी को बताता यहाँ से आओ। देहरादून वाली मैडम को काफी मुश्किल हो रही थी उनको वो लड़का पूरे रास्ते पक्कड़ कर लेकर गया ।वैसे तो पार्वती कुण्ड से पहले की रास्ता पत्थरो  वाला मिलने लगता है पर पार्वती कुण्ड के बाद तो पत्थर काफी मुश्किल  पैदा करते है ।अब सभी लोग साथ मे ही चल रहे थे एक दो बार तो ऐसी जगह आयी जहाँ हमे लगा आगे रास्ता है ही नही पर फिर किसी बड़े पत्थर पर चढ़ कर देखते सही रास्ता किधर है ।एक बार तो मैं गलत रास्ते चला गया बाकी सब आगे निकल गए गलत रास्ते पर जाने का एक फायदा जरूर हुआ मुझे एक ब्रह्म कमल मिल गया मैंने ब्रह्म कमल पहली बार देखा था और इसे तोड़ लिया चलो भोले को अर्पित कर दूंगा ।तभी बब्बू ने आवाज लगाई उधर से आ जाओ वो रास्ता आसान है तो मैं उस के बताए रास्ते से आगे बढ़ने लगा ।थोड़ी देर बाद एकदम सीधी चड़ाई आ गयी अरे इसपर कैसे चड़ेगे चल भाई शिमला वाले तू चड़ कर दिखा हम सभी तेरे पीछे पीछे आएंगे वो तो पक्का पहाड़ी था एक मिनट में चढ़ गया चड़ तो हम भी गए पर हमें समय थोड़ा ज्यादा लगा और गला सूखने लगा तो सभी ने थोड़ा थोड़ा पानी पिया थोड़ा पानी इस लिए पिया क्योके पानी इतना ठंडा था कि एक घूंट भी मुश्किल से पिया ।थोड़ी देर बाद एक  गुफा की तरह रास्ता मिला अब आगे इसी छेद से जा सकते थे तो पहले अपने पहाड़ी बन्दू गए फिर सभी बारी बारी उसमे से निकले ।

अब तक पीछे से ओर भी कई यात्री आ गए थे ।सभी जालंधर वाले और भी कई लोग थे ।उस पत्थरों के छेद से निकलने के बाद हम फिर कुछ समय के लिए रुक गए ।थोड़ा आराम किया फिर चल दिये आगे ।

जितना इस चड़ाई से डर लग रहा था उस से भी ज्यादा मौसम हमे डरा रहा था कभी कभी तो लगता था कि अब तो  बारिश पक्का शुरू होगी एकदम काले बादल आ जाते थे ।हवा भी काफी तेज और ठण्डी चल रही थी। कुछ देर बाद फिर एकदम सीधी चड़ाई ओर बड़े बड़े पत्थर इसे भी जैसे तैसे चढ़ ही गए। अब हम समुन्द्र तल से 16000 से ज्यादा ऊपर होंगे जिस वजह से ऑक्सीजन की कमी थी और इस कारण से हमारी सांस भी फूल रही थी ।सर में भी हल्का सा भारीपन आ गया था।इन पथरो पर डंडे को पक्कड़ कर चलना बहुत मुश्किल लग रहा था तो हमने एक जगह बड़े से पत्थर पर अपने पिठु बैग और डंडे रख दिए अब वापसी पर इन्हें उठा लेंगे ।अब हम ऐसी जगह पर आ गए थे जिस से हमे दूसरी तरफ दूर जंगल दिखाई देने लगा आज काफी देर से हम इस पत्थरो के जंगल मे चल रहे थे हरयाली हमे काफी समय के बाद दिखी चाहे ये हरयाली हमसे काफी दूर थी  पर फिर भी अच्छा लगा ।हमारे में से कोई भी पहले यहां नही आया था इस कारण हम किसी से ये भी नही पूछ सकते थे शिला अब कितनी दूर है ।

 
अब मैं एकदम चुप चाप सा चलने लगा था मन मे पता नही क्या अजीब सा महसूस हो रहा था मानो मैं इस दुनिया में ही नही हूँ ना कोई डर ना कोई फिक्र बस कोई शक्ति थी जिस ने मुझे अपने वश में कर लिया था ।मैंने आज तक ऐसा कभी महसूस नही किया था शायद भोले बाबा की शक्ति थी ।वैसे इस यात्रा पर आने से पहले मेरे साथ कुछ ऐसा हो गया था जिस कारण मैं भोले बाबा से बहुत ज्यादा नाराज हो गया था ।पहले तो मैंने इस यात्रा पर आना ही कैंसिल कर दिया था पर फिर मैंने  भोले को मन मे ही बोल दिया था मैं आप के पास जरूर आऊंगा  अगर आप मे शक्ति है तो मुझे रोक लेना ,मैं आऊंगा जरूर पर शिला की पूजा नही करूँगा आप भी अपना पूरा जोर लगा लेना पर आप मुझे हरा नही पाएँगे ।कभी कभी हम पता नही क्या क्या सोचने लगते हैं और बाद में इन्ही बातो पर हँसी भी आती है ।थोड़ी देर बाद जब हम शिला के बिकुल सामने पहुंचे मैं रोने लगा बब्बू ने पूछा क्या हुआ भाई पर मुझे कोई होश ही  नही था मैं रोता रहा कुछ देर बाद जब सभी लोग जोर जोर से जैकारे लगाने लगे तो मुझे होश आया मैंने अपने जूते उतारे रेनकोट पहन रखा था उसे भी उतारा और मोबाइल निकाला नेटवर्क नही था ।घर पर बोल कर आया था अगर नेटवर्क हुआ तो वीडियो कॉल करूँगा पर हवा तेज चल रही थी शायद इस लिए रेंज नही आ रही थी ।पर थोड़ी देर में ही मौसम भी साफ हो गया  धूप भी निकल आई पर नेटवर्क नही आया।पहले कुछ देर बैठ कर आराम किया सभी ने । फिर सभी वीडियो बनाने लगे जब शिला को माथा टेकने की बारी आई तो सब से पहले मैं ही खड़ा हुआ जब के मैं भोले  को बोल कर आया था मैं माथा नही टेकूँगा पर मैं हार गया मैं भूल ही गया था कि मैं तो भोले से नाराज हूँ सबसे पहले मैं खड़ा हुआ साथ ही बब्बू भी आ गया ।
शिला के पास जाने के लिए एकदम पतला सा रास्ता है एक तरफ हजारो फुट गहरी खाई है और दूसरी तरफ कुछ फुट नीचे पत्थर ही पत्थर है अगर किसी भी ओर गिरे तो मौत पक्की है ।हम दोनों बड़े ध्यान से शिला के पास पहुंचे जैसी भी हमको पूजा करनी आती थी अपनी तरफ से की ओर वापिस पीछे आ कर बैठ गए। हमारे बाद सभी ने बारी बारी से पूजा की ।शिमला वाला लड़का काफी पूजा पाठ जानता था उस ने आरती और शिव चालीस पड़ी। जिस दिन हम ने दर्शन किये थे उस दिन मंगलवार था तो हनुमान चालीसा का पाठ भी किया ।जब  हम बैठे थे तो मैं फिर भावुक हो गया और फिर रोने लगा सोच रहा था मैं कितना पागल हूँ भोले बाबा को चैलेंज करने लगा था कि मैं आप तक पहुँचूँगा पर माथा नही टेकूँगा पर जब यहाँ पहुँचा तो माथा भी सबसे पहले टेका ओर अब रो भी रहा हूँ ।ये हम भोले के ही भगत है जो ऐसा कर सकते है वरना ओर कौनसे धर्म मे कोई अपने भगवान से ऐसे बोल सकता  है ।एक भोले बाबा ही है जो हम जैसे राक्षस प्रविर्ती के लोगो को भी अपना बच्चा समझ कर अपना लेते है। आप यकीन नही करोगे ये सब बातें लिखते हुए भी मेरी आँखों मे आंसू है।
चलो बहुत हुई ये बाते अब यात्रा पर वापिस आते है  अब तकरीबन हमे एक घंटा हो गया था हमे यहाँ रुके हुए तो हम सभी भोले से विदा लेकर वापिस चलने लगे ।इस चड़ाई को चढ़ने में बहुत मुश्किल होती है पर उतरना तो और भी ज्यादा मुश्किल है ।मुझे तो वैसे भी उतरना ज्यादा मुश्किल लगता है ।इस ट्रैक पर एक मुश्किल ये थी कि जिन पथरो पर हम पथरो को पक्कड़ पक्कड़ कर चड़ जाते है उतरते हुए जा तो लटकना पड़ता है जा कूदना पड़ेगा पकड़ते है तो कभी बैग कहीं फस जाता है तो कहीं कपड़े घिस जाते है। और कूदने से आप को झटके काफी लगते है जिस से आप थक जाते है।पर जब यहाँ आये है तो इन मुश्किलो का सामना तो करना ही पड़ेगा ।वापसी पर मैं सब से आगे चल रहा था वैसे वापसी पर मैं सब से पीछे होता हूँ इस बार आगे था।मैं तेजी से उतर रहा था मुझे पता था अब अगर मैं जहाँ बैठ गया तो शरीर ठंडा हो जाएगा जिस वजह से चलने में मुश्किल होगी ।वापसी पर उस गुफा जैसे छेद को पार करने तक हम सब साथ ही थे उसके बाद सब आराम करने लगे पर मैं आगे चलता रहा ।मैं पार्वती कुण्ड तक लगातार चलता रहा यहां पर मैं एक काफी बड़े पत्थर पर बैठ गया ।थोड़ी देर बाद बब्बू ओर शिमला वाला लड़का भी आ गया । मैं पार्वती कुण्ड में से पानी लेने के लिए गया तो पानी भरते हुए मुझे अजीब सी स्मेल आयी तो मेरा मूड एकदम से बदल गया। मैं बब्बू के पास आकर बैठ गया तो लगा मुझे उल्टी आएगी तो बब्बू ने बोला साइड में जाकर उल्टी करले नही तो पूरे रास्ते दिक्कत होगी ।मैंने साइड में जाकर उल्टी की सर दर्द करने लगा था ।थोड़ी देर आराम करने के बाद हम खड़े हुए और नीचे उतरने लगे उल्टी के बाद शरीर काफी कमजोरी महसूस करने लगा था ।हम तीनों चल रहे थे काफी समय के बाद मैंने बब्बू को कहा यार कोई वापिस आता हुआ क्यों नही दिख रहा तो बब्बू बोला धीरे धीरे आ रहे होंगे। पर फिर कुछ समय बाद मैंने कहा यार हम इस रास्ते से नही आए थे ये रास्ता अलग है ।पर रास्ते मे कहीं कहीं हमे निशान लगे हुए दिख रहे थे तो मुझे लगा शायद सुबह मैंने ज्यादा ध्यान नहीं दिया होगा पर एक घंटे बाद शिमला वाला लड़का बोला हम दूसरे रास्ते पर आ गए हैं पर कोई बात नही इस पर निशान है हम गुफा तक पहुंच जाएंगे ।मुझे अब काफी थकावट महसूस हो रही थी चलने का बिल्कुल भी दिल नही कर रहा था। बब्बू ओर शिमला वाला लड़का आगे आगे चल रहे थे मै पीछे पीछे चल रहा था।करीब दो घंटे के बाद ये पत्थर कम हुए अब मिट्टी वाले पहाड़ आ गए ।पर मेरी हालत में कोई फर्क नही था।
इस रास्ते पर हम पिछले काफी समय से चल रहे थे पर  हमे कोई भी यात्री नजर नही आ रहा था ।वैसे इस जगह रास्ता भटकने का डर नही था क्योंकि वापसी पर हम उस नाले  को देख रहे थे जो गुफा से थोड़ा पहले मिलता है इसके साथ साथ चल कर हम वहाँ तक तो पहुंच ही जायेंगे ।।अब काफी देर बाद मुझे कोई नीचे उतरता हुआ दिखाई दिया वो काफी तेजी से उतर रहा था थोड़ी देर में ही वो मेरे पास पहुंच गया उसको देखकर मैं सिर्फ मुस्कुराया बोलने की हिम्मत नही थी उसने पूछा भी भाई ठीक हो मैंने सिर्फ हाँ में सिर हिलाया ।थोड़ी देर वो मेरे साथ साथ चला फिर आगे निकल गया ।अब बब्बू ने मुझे आवाज लगा कर कहा भाई वो देखो गुफा आने वाली हैं जल्दी चलो मैंने भी थोड़ी हिम्मत दिखाई और थोड़ा तेज चलने लगा ।कुछ देर बाद हम गुफा में थे ।यहां आकर हम बैठ गए काफी यात्री नीचे से आ गए थे सभी हरियाणा से थे ।सभी ने हमसे पूछा दर्शन हो गए और आप सुबह आप कितने बजे यहाँ से निकले थे हमने  उनको सब कुछ बताया आगे रास्ता कैसा है आप सुबह कितने बजे निकले और क्या करे ।15-20 मिनेट आराम के बाद हमारी थकावट काफी दूर हो गयी ।वहाँ पर एक यात्री ने हमे एक बिस्किट का पैकेट दिया जिसे खा कर भूख से भी कुछ राहत मिली तब तक देहरादून वाली मैडम भी आ गई थी उन्होंने बताया बाकी लोग अभी काफी पीछे है ।अब हम काफी फ्रेश महसूस कर रहे थे और समय भी अभी 4 ही बजे थे तो बब्बू बोला आगे चले तो मैंने हाँ बोल दी तो देहरादून वाली मैडम बोली मैं भी चलूंगी थोडी देर रुक जाओ तो हम कुछ समय और रुक गए 20 मिनेट बाद हम फिर नीचे की ओर चल दिए। कल जब हम ने ग्लेशियर पार किया था तो इसमें बर्फ काफी थी पर आज तो बर्फ काफी कम हो गईं थी इसे पार करने के लिए हमे काफी ऊपर पहाड़ पर चड़ना पड़ा जब हम इसे पार कर रहे थे तो धुन्ध काफी हो गईं थी जिस वजह से हमने डरते डरते ही पार किया । इसे पार करने के बाद इसमें से फिर पानी की बोतल भरी और आगे चल पड़े। इसके बाद हमे चड़ाई मिली मुझे तो बहुत अच्छा लगा चड़ाई देख कर उतरने के नाम पर मुझे बहुत डर लगता है ।जब हम चड़ रहे थे तो हमे कुछ आर्मी के लोग आते हुए मिले पूछने पर इन्होंने बताया इस बार सरकार ने आर्मी को यात्रा की जिमेवारी दी है वो ऊपर रह कर मेडिकल की सुविधा देंगे ता के यात्रियों को ज्यादा मुश्किल न हो ये सुविधा भी पहली बार ही मिल रही हैं ।जैसे जैसे इस यात्रा पर लोग ज्यादा जाने लगेंगे सुविधा भी ज्यादा मिलने लगेगी ।हमारे थोड़ा सा आगे जाते ही चड़ाई भी खत्म हो गई अब फिर से उतरना पड़ेगा ।हम तीनों आराम से उतरते रहे ।काफी समय बाद हमे गणेश पार्क दिखने लगा तो बब्बू बोला जल्दी करो नही तो हमे जगह नही मिलेगी रात को रहने के लिए। मैं बोला तुम जल्दी से जाकर कुछ देख लो रहने के लिए मैं आता हूँ आराम से बब्बू की स्पीड चढ़ते समय और उतरते समय एक जैसी ही रहती है मैं चड़ तो आराम से जाता हूँ उतरते समय थोड़ी दिक्कत होती है ।वैसे आज भोले बाबा की हम पर पूरी कृपा रही के बारिश नही हुई जबके पूरा दिन बादल छाय रहे सारा दिन हम डरते रहे के अब बारिश होगी एक बार तो इतने बादल आ गए थे कि कोई भी नही कह सकता था कि अब बारिश नही होगी पर फिर तेज हवा के कारण बादल चले गए थे ।थोड़ी देर बाद जब मैं गणेश पार्क पहुंचा तो बब्बू वहाँ बैठा था ।मैंने पूछा क्या हुआ मिली जगह तो वो बोला नही यार कोई भी टेंट खाली नही है सब अपने टेंट नीचे से लेकर आए हैं और फोरेस्ट हाउस वालो का कमरा भी फुल हो गया है ।जब मैं कमरे के अंदर गया तो एकदम से बाहर आ गया अन्दर भोले के कुछ भक्त चिलम फूंक रहे थे पूरा कमरा धुंए से भरा पड़ा था और मैं इस धुंए में एक मिनेट भी नही रह सकता।मैं भी वापिस आकर बब्बू के पास बैठ गया ।देहरादून वाली मैडम तो आज फिर किसी ग्रुप के पास चली गयी जिस में कुछ औरते थी उन्हें वहाँ रुकने की जगह मिल गई थी। थोड़ी देर बाद मैंने एक पोटर को बोला यार कोई रुकने का प्रबन्द कर दो तो वो बोला कोई भी टेंट खाली नही है फिर मैंने बोला यार तू पैसे बोल कितने चाहिए तो वो बोला मैं कुछ करता हूँ आप रुको ।10 मिनेट बाद वो हमारे पास आया ओर 500 में हमे एक टेंट लगा कर दे दिया। अब बारी थी खाने की तो हमने उन्हें कहा भाई अब कुछ खिला दो उस ने पता भी किया पर कुछ मिला नही तो हम ऐसे ही सोने की तैयारी करने लगे। काफी थक गए थे आज सुबह 4 बजे से चल रहे थे और अब 7 बज रहे है । जब टेंट में गए तो नीचे जगह समतल नही थी कुछ चुभ रहा था तो एक कम्बल ओर नीचे बिछाया पर कोई ज्यादा फर्क नही पड़ा ।अब हमने अपने घर पर फ़ोन किया घर वाले भी खुश थे कि हमे दर्शन हो गए घर पर बात करने के बाद हम सो गए  ।।

आज के लिए बस इतना ही अगले भाग में आप को बतायेगे कैसे हम नीचे उतरे और फिर सांगला वैली घूमे ।



Tuesday, 4 September 2018

किन्नर कैलाश भाग -2 गणेश पार्क से गुफा तक

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रात को नींद न आने के कारण अभी थोड़ी सुस्ती थी ।चाय पीने का भी मन नही था सोच रहे थे गणेश पार्क में कोई दुकान मिली तो वहां पी लेंगे। वैसे आज हम सोच रहे थे कि गुफा तक जाए जा दर्शन भी कर ले ,अभी तक तो हम ज्यादा थके नही थे पर मन मे एक बात जरूर चल रही थी जल्दवाजी में कही बिना दर्शन किये वापिस ना आना पड़ जाए इस लिए सोचा आज गुफा में ही रुकेंगे बाकी वहाँ जा कर देखते है। सुबह सभी 6 बजे उठे मैं ओर बब्बू तो सोए ही नही थे ।हम दोनों को किसी भी यात्रा में एक ही दिक्कत आती है वो है नींद की बाकी सब कुछ हम एडजस्ट कर लेते हैं बस नींद नही आती हमे ।जिस जगह हम रुके थे वहाँ दो चंडीगड़ से आए हुए लड़के भी रुके हुए थे। वो भी हमारे साथ ही चलने वाले थे ।थोड़ी देर में हमने ब्रश वगैरा किया और चल पड़े अपनी मंजिल की और ।

       अभी गणेश पार्क थोड़ा दूर था ।हम अब 7 लोग थे सबसे आगे नंगल वाले डॉक्टर जी थे और उनके पीछे मैं और बब्बू थे बाकी सब पीछे थे ।आज हमने डॉक्टर जी को ज्यादा आगे नही निकलने दिया ।मौसम भी एकदम मस्त था । थोड़ी देर में ही हम गणेश पार्क पहुंच गए यहाँ पर एक बड़ा सा कमरा बना हुआ है फारेस्ट वालो ने बनाया है इसे पर शायद वो यहाँ आते कम ही होंगे क्योंकि ये पूरी तरह खाली था।रात को रुकने के लिए अच्छी जगह है ये। यहाँ पर कम्बल भी पड़े थे तभी एक लोकल बन्दा आया उस ने बताया गुफा में आप को रहने की जगह मिल जाएगी मगर वहाँ हम सो भी गए तो ठण्ड तो लगेगी इस लिए आप यहाँ से कम्बल ले जाओ और वापिस आते समय ले आना। तो हम ने( मैं और बब्बू ने )चार चार कम्बल उठा लिए सोचा दो दो तो नीचे बिछा लेंगे और दो दो ऊपर ले लेंगे ।हम काफी देर बैठे रहे तभी बाकी लोग भी आ गए उन्होंने भी एक एक कम्बल उठा लिया ।सुबह का समय था तो धुन्ध भी काफी हो गई थी ठंड भी लग रही थी ।यहाँ से व्यू बहुत सुंदर दिख रहे थे सुबह का समय ऊपर से हल्की हल्की धुन्ध एक नशा से होने लगा था मुझे ।दिल तो कर रहा था कुछ देर ओर यहीं रुक जाय पर आगे भी तो जाना ही था।इस यात्रा में आप को जो एकांत मिलता है  वो ओर कही कम ही मिलेगा ।इस यात्रा में आप को चड़ाई भी बहुत  मिलती है ।पूरा रास्ता एकदम खड़ी चड़ाई वाला है।अब मैं ओर बब्बू आगे निकल गए थे। हमें आज कोई जल्दी नही थी इस लिए हम आराम से ही चल रहे थे ।कोई कोई यात्री हमे वापिस आता हुआ भी मिल रहा था ।अगर हम अमरनाथ या मणिमहेश होते तो अब तक पता नही कितने हजार लोग हमें आते जाते मिल जाते पर यहाँ अभी तक मुश्किल से 20 लोग मिले होंगे ।श्रीखंड आप को लोकल लोग दुकाने लगाते जा खाने पीने का सामान लाते लेजाते हुए मिल जाते है पर किन्नर कैलाश तो दुकाने भी बहुत कम लगती है   जिस से आप को लोकल भी कम ही मिलते हैं।
             
          अब काफी समय हो गया था हमे चलते हुए बब्बू बोला कुछ खा ले ।भूख तो मुझे भी लग रही थी इस लिए हम बैठ गए बाकी सब पीछे थे ।मैंने बैग में से बिस्किट का पैकेट निकाला और दोनों ने खा लिया बब्बू बोला और क्या है खाने को तो मैंने कहा भाई दो पैकेट ओर है बिस्किट के ये कल के लिए रख लेते है तो बोला भूख लग रही है यार पर क्या कर सकते थे ।पर हमारी फिक्र तो भोले बाबा को थी इस लिए उन्होंने हमारे लिए थोड़ा प्रशाद भेज ही दिया ।थोड़ी देर में हमारे पास दो लड़के आ कर रुक गए वो दोनों शिमला से थे उनके पास  मेवा था थोड़ा सा हम दोनों को भी दिया इस से कुछ एनर्जी आई। तभी डॉक्टर जी भी आ गए बाकी लोग अभी पीछे आ रहे थे। हम दोनों आगे चल पड़े ।पानी की कमी हमे काफी महसूस हो रही थी पर अभी तक पानी नही मिला था  ।एक बोतल में सुबह टेंट वाले से लिया था पर उसमे मिट्टी काफी मिली हुई थी थोड़ी सी मिट्टी के तेल की स्मेल भी आ रही थी इस लिए उसे गिरा दिया था ।खाली बोतल थी हमारे पास आप एक बात का ख्याल जरूर रखे जब भी पहाड़ो में जाए तो खाली बोतल या कोई भी पन्नी न फैंके ये पहाड़ सफाई की वजह से ही सुंदर लगते है इन्हें गन्दा मत करे। हमें भी सिर्फ पानी गिराया था बोतल हमारे पास थी और जो भी बिस्किट खाए थे उनकी पन्नी हम बैग में रख लेते थे। अब मैं ओर बब्बू अकेले चल रहे थे शिमला वाले आगे चले गए थे थोड़ी देर चलने के बाद हम एक जगह रुक गए यहाँ से हमे पानी का झरना दिख रहा था और यहाँ से रास्ता भी डलहान वाला था थोड़ा आराम किया और फिर चल पड़े।

  अब एकदम उतरना था तो थोड़ी स्पीड कम की रास्ता एकदम पतला था ज्यादा जगह नही थी चलने के लिए और कभी कभी कोई यात्री भी वापिस आता हुआ मिल जाता था ।अभी तक जो भी मिला था सब को दर्शन हुए थे पर अभी तक मिले ही कितने थे ।हम सम्बल कर चल रहे थे रात को बारिश हुई होगी यहाँ इस लिए रास्ता पूरा गिला और फिसलन वाला था ।पर इतना भी मुश्किल नही था कि हमे कोई ज्यादा डर लगे।जल्दी ही हम झरने के पास पहुंच गए इसके ऊपर पूरा बर्फ़ का ग्लेशियर था। सबसे पहले जी भर के पानी पिया पानी भी एकदम ठंडा था ।थोड़ा आराम किया और अपनी पानी की बोतल भर कर ग्लेशियर पार करने लगे कोई ज्यादा बड़ा ग्लेशियर नही था पर नीचे से पानी की वजह से बर्फ़ की मोटाई ज्यादा नही थी इस लिए थोड़ा डर लगा इसे बड़े ध्यान से पार किया तभी कुछ यात्री वापिस आते हुए मिले।कुछ गुजरात से थे और कुछ राजस्थान से कोई 12 जा 15 लोग होंगे पर इनमे से सिर्फ एक को दर्शन हुए थे बाकी सब पार्वती कुंड से वापिस लौट आए थे। मैं ओर बब्बू इनकी बात सुनकर एक दूसरे के मुँह की तरफ देखने लगे कही हम भी रास्ते से वापिस न आ जाए ।फिर एक दूसरे को समझाया नही यार हम नही रास्ते मे से लौटेंगे हम दर्शन जरूर करेगे ।इन लोगो की बाते सुनकर लगा ये यात्रा सच मे काफी कठिन है ।इन्होंने बताया यहाँ तक तो रास्ता आसान है असली मुश्किल आगे जाकर आएगी ।यहां से 10 मिनेट चलने पर हम गुफा में पहुंच गए। यहां 10 लोग पहले से ही बैठे थे ये सभी जालंधर से आये थे ।अभी 11 भी नही बजे थे मैंने और बब्बू ने आगे जाने का मन बना लिया। मैंने एक छोटा  पिठु बैग एक्स्ट्रा रखा था अपने पास उसको निकाला और जरूरी सामान जैसे रेनकोट, दवाई और बिस्किट इसमे रख लिए ओर थोड़ी देर आराम करने के बाद आगे चल पड़े और गुफा में बैठे लोगों को बोल दिया हमारे साथी पीछे आ रहे है उनको बता देना हम आगे चले गए हैं। हम थोड़ा आगे गए थे अभी तो हमे वही शिमला वाला एक लड़का वापिस आता हुआ मिला हमने पूछा भाई बड़ी जल्दी वापिस आ गए तो उस ने बताया वो रास्ते में से ही वापिस आ गया है ऊपर मौसम काफी खराब है वो कल सुबह जाएगा दर्शन करने उसका एक साथी चला गया है ।तो मैं और बब्बू भी वापिस आ गए सोचा कल जाएंगे ।वापिस गुफा में आए तो अभी सिर्फ डॉक्टर जी ही आये थे हमने अपना बैग रखा और गुफा में लेट गए आराम करने लगे तभी वो चंडीगड़ ओर नंगल वाले भी आ गए। अभी कुछ और यात्री भी आ रहे थे तो हमने गुफा में अपनी अपनी जगह रोक ली बाद में फिर दिक्कत होगी।गुफा में मोबाइल का नेटवर्क आ रहा था तो हमने घर पे भी फ़ोन कर दिए। अभी सारा दिन बाकी था तो हम सब अपनी अपनी पहले की हुई यात्रा के बारे मे एक दूसरे को बताने लगे ।थोड़ी देर बाद एकदम अंधेरा हो गया बारिश भी होने लगी ।मैंने बब्बू से कहा भाई अच्छा किया वापिस आ गए नही तो बारिश में फस जाते । लेकिन बारिश ज्यादा समय नही रही थोड़ी देर बाद रुक गई ।गुफा में काफी भीड़ हो गई थी इसमे 15 लोग रह सकते है  हम तो 20 के करीब थे गुफा में। जिस तरह एक बार लेट गए वैसे ही पड़े रहे करवट भी नही बदली गई ।काफी समय बाद मुझे कुछ खुशबू आई मैंने बब्बू को बोला यार किसी के बैग में पराठे है ।बब्बू बोला बकवास मत कर सो जा पर मैंने कहा यार पक्का है तू पूछ किसी को तो वो बोला मैं नही पूछुंगा तू पूछ लें ।मैंने जोर से आवाज लगाई भाई किसी की बैग में परांठे है मुझे खुसबू आ रही है अगर हो सके तो एक दे दो भूख लग रही है तो जालंधर वालो में से एक ने कहा मेरे बैग मे परांठे है लाल बैग है ढूंढ लो और खा लो।

 दिल मे अब जो खुशी थी मैं आप को बता नही सकता।आज पूरे दिन में सिर्फ एक बिस्किट का पैकेट खाया था हम दोनों ने मिल कर भूख बहुत लग रही थी।मैंने टोर्च निकाली और वो लाल बैग ढूंढने लगा ।पर यहाँ तो तीन चार लाल बैग पड़े थे मैंने फिर पूछा भाई कोनसा लाल बैग आपका है यहाँ तो तीन चार पड़े है तो वो बोला भाई सभी चैक करलो ।
मैंने फिर अपनी नाक को काम पर लगाया बिना खोले पता कर ही लिया किस बैग में पराठे है ।बैग को खोला तो उसमें दो परांठे थे आम का अचार भी मैं तो खुशी के मारे पागल ही हो गया था। पर मेरी खुशी ज्यादा देर नही रही एक परांठा तो बब्बू ने दोस्ती का वास्ता दे कर ले लिया। पर अब एक परांठा अब भी मेरे पास था तभी एक जालंधर वाले लड़के ने कहा भाई थोड़ा मुझे भी दे दो आधा उसे दे दिया तभी चंडीगढ़ वाला लड़का बोल पड़ा भाई थोड़ा मुझे भी दे दो उसे बब्बू ने दे दिया आधा चलो कोई नही आधा ही सही परांठा तो मिला भोले बाबा का धन्यवाद किया और परांठा खाने लगा तभी एक लड़का और बोला भाई थोड़ा मुझे भी दे दो तो आधे में से आधा उसे दे दिया अब मेरे पास सिर्फ एक निवाला बचा था उसे में खा गया कहीं कोई और न मांग ले ।कुछ समय पहले मैं कितना अमीर था दो दो परांठो का मालिक पर जब खाने लगा तो सिर्फ एक निवाला अंदर गया ।सही कहा है किसी ने दाने दाने पर लिखा है खाने वाले का नाम परांठे बनवा कर कोई लाया बैग में से किसी ओर ने निकाले और खाए कितनो ने।वैसे एक निवाला खा कर भूख शांत हो गई ये भी भोले का चमत्कार ही था। अभी हम बाते कर रहे थे तभी एक ग्रुप ओर आ गया नीचे से इसमे कुछ औरते भी थी इनके पास पोटर भी थे इन्होंने अपने टेंट लगा लिए।
अब हम गुफा के पास तकरीबन 25 से 30 यात्री थे।मैंने सभी से पूछा आप सुबह कितने बजे निकलोगे ज्यातर ने सुबह 4 बजे बोला पर मैंने बब्बू को बोला हम 3 बजे निकल पड़ेंगे ।मैंने सुबह 2 बजे का अलार्म लगा दिया ।आज हमने काफी आराम कर लिया था सुबह 11 बजे से यही पड़े थे पर शाम को गुफा में ज्यादा भीड़ होने की वजह से हम एक तरफ करवट ले कर ही पड़े थे जिस से आराम की जगह तकलीफ ही हो रही थी।नींद तो बिल्कुल भी नही आ रही थी एक दो जने सो रहे थे उनके खराटे गुफा में गूंज रहे थे ।तभी एक लेडिस आई उन्होंने हमसे पॉवर बैंक मांगा फ़ोन चार्ज करने के लिए मैंने दे दिया ।वो देहरादून से अकेली आई थी कमाल की हिमत थी उनमे यहाँ हमारे घर वाले हमे अकेला नही जाने देते वो औरत हो कर अकेले आ गई थी।रात को वो उस ग्रुप वालो के साथ ही रुकने वाली थी जिस में कुछ औरते भी थी ।फिर उन्होंने हमें पूछा आप कितने बजे निकलोगे सुबह मैंने बता दिया 3 बजे निकलेंगे तो वो बोली मैं भी आप के साथ चलूंगी हमने कहा कोई दिक्कत नही है हम आप को उठा देंगे सुबह।थोड़ी देर ऐसे ही बाते करते रहे अब थोड़ी थोड़ी नींद भी आने लगी थी।तो हम भी सोने की कोशिश करने लगे।थोड़ी देर सोए होंगे तभी मुझे कुछ आवाज सुनाई दी जब आवाज लगाई कौन है तो एक लड़का बोला भाई मैं ऊपर से दर्शन करके वापिस आया हूँ थोड़ी सी जगह दे दो बाहर बारिश हो रही है ।  तभी नंगल वाले भी   जाग गए पूछने लगे क्या हुआ और टोर्च चलाई तो देखा वो लड़का पूरी तरह से भीग गया था और कांप रहा था उसकी हालत काफी खराब लग रही थी हमने उसे गुफा के अंदर बुलाया गीले कपड़े उतार कर उसे अंदर बिठाया दो तीन कम्बल दिए ।अरे ये तो वही शिमला वाला लड़का है जो सुबह हमे मिला था इसका एक साथी हमारे साथ गुफा में ही था। वो सो रहा था उसे भी उठाया भाई तेरा दोस्त आया है उठ जा ।जो ऊपर से आया था उसने बताया ऊपर मौसम बहुत खराब था वापसी पर सारे रास्ते बारिश नही रुकी तो उसके दोस्त ने कहा तुजे कहा तो था वापिस चल कल दर्शन कर लेंगे तो माना ही नहीं अगर कुछ हो जाता तो।थोड़ी देर कम्बल में बैठ कर उसको कुछ गर्मी मिली फिर उसे पूछा भाई कुछ खाओगे तो बोला दे दो अगर कुछ है तो चंडीगड़ वाले लड़को ने उसे कुछ बिस्किट ओर थोड़ा सा मेवा दे दिया इसे खा कर उसे काफी राहत मिली। थोड़ी देर बाद हम भी दुबारा सो गए।
आज के लिए बस इतना ही बाकी यात्रा अगले भाग में




Friday, 10 August 2018

किन्नर कैलाश यात्रा 2017 भाग -1

                    | हर हर महादेव|
पिछले ब्लॉग में मैंने श्रीखंड कैलाश यात्रा का वर्णन किया था इस बार एक और कैलाश किन्नर कैलाश की बात करते हैं ।वैसे मैंने पहले भी किन्नर कैलाश का ब्लॉग लिखा था पर वो ज्यादा डिटेल में नही था और वो अब डिलीट भी हो गया इस लिए अब अच्छे से दुबारा लिखने की कोशिश करूँगा ।भोले के 5 कैलाश की यात्रा करने का मन मे काफी पहले से सोच रखा था इस की शुरुआत पिछले साल मणिमहेश से हो गई है और इस साल दूसरा कैलाश किन्नर कैलाश जाना है। किन्नर कैलाश सभी कैलाशो में से सब से कठिन माना जाता है यहाँ पर सुविधा भी नाममात्र की है। इस यात्रा की तैयारिया मणिमहेश से आने के फौरन बाद शुरू हो गई थी। जब भी समय मिलता यूट्यूब और गूगल पर सर्च करता रहता पर इस यात्रा के बारे में कम ही वीडियो और ब्लॉग है। ब्लॉग तो मुझे सिर्फ संदीप पोवार जी का ही मिला।इस से काफी जानकारी मिली ।मेरे साथ जो पिछले साल मणिमहेश गए थे उन सब दोस्तो से पूछा आप लोग जाओगे तो सिर्फ बब्बू ने ही हाँ बोली बाकी सब यात्रा की वीडियो देख कर ना बोल गए।लेकिन मैं और बब्बू का पक्का था जो हो जाए हम पक्का जाएंगे ।इस के बाद फेसबुक पर यात्रा के बारे में और पता करने लगा तो एक ग्रुप में  अक्षय जी से बात होने लगी वो भी यात्रा पर जाना चाहते थे उनके साथ फ़ोन पर भी कई बार बात हुई तो हम ने तय कर लिया हम तीनों इक्कठे चलेंगे धीरे धीरे दिन निकल गए और जुलाई का महीना भी आ गया ।वैसे तो यात्रा 1 अगस्त से 11 अगस्त तक चलती है पर हम ने 15 जुलाई को जाने का मन बना लिया ।आप ये मत सोचना यात्रा 1 अगस्त को शुरू होती है तो आप को सभी सुविधा मिलेगी लंगर सिर्फ नीचे पोवारी में ही लगते है ऊपर सिर्फ गणेश पार्क में आप को कुछ प्राइवेट दुकाने मिलेगी उस से आगे गुफा के पास कोई सुविधा नही है आप अगर अपना टेंट लेकर जाओगे तो ठीक है ।नही तो आप को गुफा में ही रात गुजारनी पड़ेगी वहाँ का भी एक पंगा है गुफा में 15 लोगो के करीब सौ सकते है ज्यादा से ज्यादा पांच छे लोग ओर बैठ सकते हैं अगर अगर कभी इस से ज्यादा लोग हो जाए वहाँ तो बारिश में दिक्कत हो सकती है ।
                    अब हम अपनी यात्रा की बात करते हैं  जब  हमारे यात्रा पर जाने के दिन पास आए तभी मुझे अपनी दुकान में कुछ ऐसी दिक्कत आ गयी के मुझे लगा मैं इस बार नही जा पाऊंगा कुछ दिन यात्रा भी आगे कर के देख लिया पर दिक्कत कम नही हुई।
           फिर मैंने सोचा अक्षय जी की यात्रा क्यू खराब करनी तो उनको फ़ोन करके बोल दिया भाई आप चले जाओ अभी हमारा पक्का नही है और हो सके तो भोले से हमारे लिए दुआ करना क्या पता वो मान जाए ।तो वो बोले कोशिश कर लो क्या पता कुछ हल निकल आए कोशिश की भी मैंने पर बात नही बनी तो अक्षय जी चले गए ।जिस दिन वो गए अगले दिन मेरी समस्या भी हल हो गई तो मैं भी तैयार हो गया जाने के लिए बब्बू को फ़ोन किया तो वो बोला भाई मेरा बैग तो पैक है जब मर्जी बोल दो आ जाऊंगा ।तो उसी समय मैंने चंडीगड़ से रामपुर की बस की 2 टिकट बुक कर दी और एक दिन छोड़ कर हम यात्रा पर जाने वाले थे हम दोनों बहुत खुश थे पर अभी एक समस्या और आ गई जिस दिन हमने जाना था उस से एक दिन पहले मुझे बुखार हो गया गला बहुत खराब हो गया था डॉक्टर से दवा ली पर ज्यादा आराम नही आया खाना भी नही खाया । हमारी बस चंडीगड़ से शाम को 7 बजे की थी तो हम संगरूर से 3 बजे निकलने की सोच रहे थे ।तो सुबह फिर दवा ली कुछ आराम आया पर मैंने सोचा रखा था जाना पक्का है जो भी हो जाए ।एक बार अक्षय को भी फ़ोन करके देखा फ़ोन बन्द आ रहा था पर थोड़ी देर बाद फ़ोन मिल गया अक्षय जी दर्शन करके वापिस आ रहे थे ।तो उनको बता दिया हम भी आ रहे हैं आप वही रुकना हम सुबह आप से मिलेंगे वो मान गए ।तो दोपहर 3 बजे हम संगरूर से चंडीगड़ की बस में बैठ गए बस 6 बजे के करीब चंडीगड़ पहुँच गई। अभी समय था तो सोचा कल रात से मैंने कुछ नही खाया था तो यहां कुछ खा लूँ तो यही बस स्टैंड में बने होटल में हमने खाना खा लिया अब गला भी ठीक लग रहा था। खाना खा कर हमने बस का पता किया तो वो अपने काउंटर पर लग गई थी । हमारी टिकट तो पहले से बुक थी तो हम अपनी सीट पर जाकर बैठ गए ।अगर किसी ने किन्नर कैलाश या श्रीखंड कैलाश बस से जाना हो तो वो चंडीगड़ से रात को 7बजे जा 8 बजे वाली बस से जा सकता है ।किन्नर कैलाश के लिए तो आप को ये बस पोवारी में लंगर के बिल्कुल आगे उतारेगी पर श्रीखंड के लिए आप को रामपुर उतर कर बस बदलनी पड़ेगी।

अब हम अपनी यात्रा पर आ जाते है ।आज गर्मी बहुत थी बस में बैठने का अभी मन नही था सोचा जब चलेगी तभी बैठ जायेगे पर बब्बू बोला नही तू चल बस में अपनी सीट पर बैठते है तो मुझे बैठना ही पड़ा । बस में भीड़ भी काफी थी ।अच्छा किया हमने अपनी टिकट पहले ही बुक कर ली नही तो पंगा हो जाता ।पंगा से याद आया हमारी बस में भी एक पंगा हो गया एक सीट पर एक लड़का बैठा था तो एक अंकल ने आ कर कहा ये मेरी सीट है ये देखो मेरी टिकट पर यही नम्बर है लड़के ने ऑनलाइन टिकट बुक की थी एक बार तो हमे भी लगा यार हमने भी ऑनलाइन बुक की है कहीं कोई हमे भी न उठा दे आ कर काफी देर तक वो लड़ते रहे जब कंडक्टर आया तो उस ने बताया अंकल की टिकट 8 बजे की बस की है तो जा कर झग़डा खत्म हुआ ।बस अपने सही समय पर चल पड़ी ।जितनी देर हम चंडीगड़ में रहे गर्मी भी लगती रही जब बस चंडीगड़ से बाहर निकली तो जाकर कुछ राहत मिली ।शिमला से कुछ पहले ये बस खाना खिलाने के लिए एक ढाबे पर रुकती है हम भी उतर कर ढाबे पर आ गए भूख तो नही थी पर फिर भी 2-2 रोटी खा ली। खाना खा कर सभी बस में आ गए तो बस आगे चल पड़ी सारी रात बस में जाग कर ही निकाली। रामपुर जा कर बस बदली अगर आप ने बस की टिकट चंडीगड़ से पोवारी की ली है तो बस बदलने पर आप को दुबारा टिकट नही लेनी पड़ती हमारी टिकट रामपुर तक कि थी तो हमने टिकट ले ली रामपुर के बाद भी बस एक बार चाय के लिए रुकती है। बस जिस जगह रुकी वहाँ कुछ समय था हमारे पास तो हमने टॉयलेट जाने का काम भी निपटा दिया  ।यहाँ पर पहाड़ बड़े खूबसूरत लग रहे थे ।सुबह का समय था तो हल्की सी धुन्ध भी थी जिस से पहाड़ और भी सुंदर लग रहे थे।जब हम चाय पी रहे थे तो हमारी बात दुकानवाले और बस के कन्डक्टर से हुई हमने बताया हम किन्नर कैलाश जा रहे है।तो उन्होंने हमें बताया आप कोशिश करना अकेले मत जाना कोई पोटर जा कोई ऐसा यात्री हो जो पहले गया हो उसको साथ मे ले जाना इस से आप को काफी मदद मिलेगी और बस कन्डक्टर ने हमे 11 रुपए दिए और बोला मेरा भी माथा टेक देना।रामपुर के बाद दिन भी निकल गया था तो अब बाहर के नजारे भी दिख रहे थे सतलुज के किनारे  बस जब जाती है तो बहुत मजा आता है ।पूरा रास्ता अच्छा बना है रोड बहुत साफ था ।सतलुज के किनारे पड़े पथरो को  पानी की जोरदार लहरों ने अलग अलग शेप दे दी है जिन्हें देख कर अच्छा लग रहा था।  बस ने हमे 9 बजे के करीब पोवारी में उतार दिया ।यहां पर हमने अक्षय जी को फ़ोन किया तो वो लंगर में थे हम भी वही चले गए ।उनसे मिलकर बहुत अच्छा लगा थोड़ी देर बात की रास्ते के बारे में पता किया कैसे और क्या करे यात्रा करते समय उन्होंने सब अच्छी तरह बता दिया।लंगर में काफी अच्छा प्रबन्द किया हुआ था।यात्री यहाँ खा पी सकते है और रात को रहने की भी व्यवस्था है ।टॉयलेट और नहाने की भी व्यवस्था है ।हमने फ्रेश होने के बाद थोड़ा बहुत खा पी कर जो फालतू समान था वो यही लंगर में रख दिया लंगर वालो ने हमे पानी की बोतल ,गुलुकोस,और डण्डे दिए ये सब हमे चड़ाई में बहुत काम आएंगे।ये सब ले कर हम यात्रा के लिए चल दिए। यहां पर हमें पंजाब के नंगल से आए हुए 3 और यात्री मिले ये हमारे साथ बस में ही आए थे। वैसे हम इनके साथ जाने से डर रहे थे कारण ये था कि बस में ये हमारी सीट की पिछली सीट पर बैठे थे और जो इनका लीडर था वो बोल रहा था हम आज चल कर शाम को सीधा गुफा में रुकेंगे ओर अगले दिन दर्शन करके वापिस गणेश पार्क आ जाएगे ओर अगले दिन दोपहर को नीचे पोवारी में पहुंच जाएंगे इस लिए हमे लगा ये तो बहुत अच्छे ट्रैकर है अगर हम इनके साथ चले तो हमारी हालत खराब हो जाएगी और बेज्जती अलग से हो जाएगी।पर फिर हमें बस कंडक्टर की बात याद आ गयी के अकेले मत जाना मुश्किल हो सकती है ।तो हम सभी साथ साथ ही चल पड़े सब से पहले हमें सतलुज  को पार करना पड़ता है उसे आप तार पर लटकी टोकरी में बैठ कर या थोड़ा दूर जा कर पुल से पार कर सकते है। हमने टोकरी से पार किया। इसे पार करने का भी अपना ही रोमांच है। इसे पार करके हम ने यात्रा शुरू कर दी ।अभी समय 11:30 हुआ था ।शुरू में तांगलिंग गांव आता है रास्ते के दोनों और सेब के पेड़ थे लाल और हरे दोनो तरह के सेब से लदे पेड़ बहुत अच्छे लग रहे थे।कई घरों में अंगूर की बेल भी लगी थी मैंने कुछ अंगूर तोड़ लिए जब खाएं तो एकदम खट्टे थे ।बब्बू ने मुझे बोला भी भाई मत तोड़ कोई देख लेगा तो गाली देगा ।मैं तो सेब भी तोड़ने वाला था पर बब्बू ने तोड़ने ही नही दिए ।
                        हम पांचो में सब से आगे नंगल वालो में से एक डॉक्टर थे वही नगल वालो के लीडर भी थे वो आगे निकल गए मैं और बब्बू उनके बाद साथ साथ ही चल रहे थे बाकी दो सरकारी मास्टर थे वो पीछे आ रहे थे।यात्रा के शुरू में ही पता चल जाता है कि यात्रा कितनी कठिन होने वाली है। करीब एक घण्टे  बाद हम एक नाले के पास पहुंचे काफी पानी था इस मे इसको पार करने के लिए एक पेड़ को काट कर इसके ऊपर रखा गया था। इसको बड़े  ध्यान से पार किया ।इसके बाद फिर एकदम चड़ाई आ गई हम भी चलते रहे ।अब रास्ता जंगल वाला था पर यह किसी जानवर का डर नही होता। हम दोनों चलते रहे  चड़ाई एकदम खड़ी थी तो थोड़ी दिक्कत हो रही थी चड़ने में तो थोड़ी देर बाद रुक जाते फिर चल पड़ते डॉक्टर साहिब आगे आगे जा रहे थे उम्र में वो 45+ के होंगे और हम अभी 30 के भी नही थे पर वो हमसे तेज थे चलने में ।जो भी इस यात्रा में गए है उन्हें पता है इस यात्रा में आप को कितनी ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है ।आज गर्मी बहुत थी चड़ते हुए और भी ज्यादा लग रही थी। मेरे पास 2 पानी की बोतल थी और बब्बू के पास एक ,2 बोतल तो हमारी खत्म भी हो गयी थी ।जब हम यात्रा शुरू कर रहे थे तो एक लोकल औरत ने हमे कहा इतना पानी क्यू उठा रखा है रास्ते मे मिल जाएगा इस लिए बब्बू ने एक पानी की बोतल निकाल दी थी और एक रख ली पर हमें नीचे नाले के बाद गणेश पार्क तक पानी नही मिला वहाँ भी जो पानी मिला उसमे मिट्टी बहुत आ रही थी ।अब काफी समय हो गया था चलते हुए तो एक जगह रुक कर कुछ आराम किया तब तक दोनों मास्टर भी आ गए। थोड़ा आराम करके हम फिर चल पड़े। थोड़ी देर बाद हमे ऊपर से कोई आता दिखा जब   पास आये तो देखा 1 विदेशी महिला और उस का पोटर थे। कमाल की बात है इस यात्रा का हमारे यहाँ बहुत कम लोगो को पता है और ये विदेशी हमे यात्रा करते हुए मिली ।2,3 यात्री हमे एक जगह आराम करते हुए मिले हम भी वही बैठ गए।मुझे हल्का हल्का भुखार लग रहा था गला भी दुबारा दर्द करने लगा था।तो बब्बू से दवा ली वैसे तो बब्बू जानवरो के डॉक्टर है पर आज कल इंसानो और जानवरों में ज्यादा फर्क भी नही है इस लिए किसी भी यात्रा पर जाते समय दवाई की जिमेवारी बब्बू की ही होती है।दवा लेकर मैंने कुछ देर आराम किया और फिर चल पड़े।दवा का असर भी थोड़ी देर में होने लगा था।थोड़ी देर ऐसे ही चलते रहे इस यात्रा के पूरे रास्ते मे आप को पानी बहुत कम मिलता है इस लिए जब आप इस यात्रा पर आओ तो पानी जरूर साथ लेकर चलो ।पूरे रास्ते मे आप को एकदम खड़ी चड़ाई ही मिलती है सीधा रास्ता तो बिल्कुल नही मिलता ।अभी यात्रा अधिकारीक तौर पर शुरू नही हुई थी इस लिए यात्री कम ही मिल रहे थे ।कम जरूर थे पर जो मिल रहे थे वो पूरे जोश में थे जब भी कोई मिलता तो उसे जय भोले की जरूर बोलते ।कुछ लोकल लड़के भी मिले ऊपर जाते हुए पर उनका ध्यान यात्रा से ज्यादा सुट्टा लगाने में था। थोड़ी देर  चलने के बाद हमे 2 टेंट लगे मिले नंगल वाले  डॉक्टर जी यही पर बैठे थे थोड़ी थोड़ी बारिश भी होने लगी थी हम भी यही बैठ गए तो डॉक्टर जी बोले क्यू न हम आज यही रुक जाए उनके दोनों साथी भी काफी पीछे रह गए थे।मैं और बब्बू अभी और चल सकते थे अभी इतनी थकावट नही हुई थी।पर बारिश की वजह से हम रुक गए वैसे बारिश भी थोड़ी देर में रुक गई थी।
पर  फिर हम आगे नही गए सोचा आगे कोई टेंट नही मिला तो क्या करेंगे।टेंट वाले को चाय बोल दी थोड़ी देर आराम किया तब तक चाय और दोनों नंगल वाले भी आ गए ।उनकी हालत काफी खराब थी ।आते ही उनको चाय पिलाई। अभी 5: 30 ही बजे थे हमने सोचा खाना भी खा लेते है और जल्दी सो जायेगे और कल सुबह जल्दी आगे चल पड़ेंगे।टेंट वाले से परांठे बनवाए और खा कर सो गए नींद भी जल्दी आ गई पर रात को 8 बजे टेंट वाले ने फिर आवाज लगा दी खाना खाओगे अरे भाई हम इंसान है अभी तो खाया था खाना हमे नही खाना कुछ तू जा।डॉक्टर साहिब खराटे बहुत जोर से मार रहे थे उसके बाद नींद ही नही आई ।मैं और बब्बू सारी रात टेंट वाले को गाली देते रहे न वो उठाता न हम सारी रात जाग कर निकलते और सुबह टेंट वाले को फेस टू फेस भी काफी कुछ बोला (देना तो मैं गाली चाहता था पर सोचा इसका इलाका है कही पिटाई न कर दे इस लिए चुप रहा) भाई तेरी वजह से रात  पूरी एक सदी जितनी लम्बी हो गयी थी सारी रात हमने जाग कर निकाली तो वो कुछ नही बोला।तो दोस्तो अभी तक बस इतना ही बाकी अगले भाग में।
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Tuesday, 31 July 2018

श्रीखंड कैलाश यात्रा भाग -4 भीमद्वारी से घर

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पूरी रात मुश्किल से कटी टांगे पूरी अकड़ गई थी। सुबह उठे तो रजाई से निकलने का मन नही कर रहा था ।मेरी टांगे इतनी दर्द कर रही थी कि दिल कर रहा था आज सारा दिन यही लेटा रहूँ।लेकिन घर तो जान ही पड़ेगा तो सब से पहले चाय बनवा कर पी फिर सामान पैक करने लगे ।जो कपड़े कल पहने थे वो सारे गीले हो गए थे और मेरे पास सिर्फ एक शर्ट ही थी जो पहन रखी थी इस लिए पैंट की जगह मैंने रेनकोट वाली पैंट ही पहन ली।अब बाकी सारा सामान पिठु बैग में डालना था लेकिन कपड़े गीले होने की वजह से पूरे कपड़े बैग में बड़ी मुश्किल से आये और जैकेट तो बाहर ही रह गई चलो इसको ऐसे ही उठा लूंगा। तभी शंकर जोशी भी आ गया।हमारे पास कुछ मैगी के पैकेट थे हमने वो रोहित की दादी को दे दिए बनाने के लिए तब तक हमने पैसो का हिसाब कर लिया ।मैं और बब्बू तो 2 दिन बाद  आज बाहर हल्के होने के लिए चले गए ।जितना आराम पेट साफ होने पर आया उतनी ही तकलीफ पानी के ज्यादा ठण्डे होने के कारण हुई।वापिस टेंट में आए तो मैगी भी बन गयी थी सभी ने मैगी खाई ।रोहित और उसकी दादी आज नीचे जा रहे थे हमने बोला हमारे साथ चलो तो वो बोले हमे  जल्दी है आप धीरे धीरे आ जाना हम चलते है।मैगी खाने के बाद हम ने अपना सारा सामान चेक किया कुछ छुटा तो नही और चल पड़े वापिस नीचे  की और।
        मौसम बिल्कुल साफ था धूप खिली हुई थी और हमारे चेहरे भी हमारे मतलब सिर्फ मेरे और बब्बू के अक्षय और जोशी को दर्शन नही हुए थे इस लिए वो थोड़े उदास थे।हमने एक बार भोले का जैकारा लगाया ।अभी रास्ता ठीक था ज्यादा मुश्किल नही था पर मेरे घुटनो में अब भी तकलीफ थी लेकिन हम चलते रहे। जोशी आज भी आगे निकल गया । इस आदमी को ग्रुप में यात्रा करने का बिल्कुल भी नही पता था।लेकिन हम तीनों आराम से चलते रहे।थोड़ी देर बाद वही जगह आ गई जहां पर हमने जाते हुए घर फ़ोन किए थे अब दोबारा फ़ोन चैक किए पर नेटवर्क नही था ।तभी हमे दो लोकल लड़के फ़ोन पर बात करते हुए मिले हमने उनसे फ़ोन मांगा तो उन्होंने बड़े प्यार से फ़ोन दे दिया। हमने अपने अपने घर फोन पर बात की ।ये दोनों भाई थे और भीम द्वारी में दुकान लगा रहे थे अभी नीचे से  सामान लेने जा रहे हैं। चलते चलते हम बाते भी करते रहे ।इन्होंने बताया ये पहली बार टेंट लगा रहे है ।इनको 2 लोगो वाले टेंट लेने थे इस लिए हमने इनको अपने टेंट बेचने की बात कर ली और ये मान गए।थोड़ा चलने के बाद मुझे चलने में फिर तकलीफ होने लगी ।तो एक लड़के ने मेरा बैग उठा लिया और दूसरे ने बब्बू का अब कुछ आराम मिला।
        जोशी तो अब दिखाई भी नही दे रहा था पत नही क्या जल्दी थी उसे नीचे जाने की ।लेकिन मुझे न तो कोई जल्दी थी न ही हिम्मत थी कि जल्दी नीचे उतर जाऊ। थोड़ी देर तो सब साथ ही चलते रहे पर फिर  बब्बू भी आगे निकल गया अक्षय भी थोड़ा आगे ही चल रहा था।पर ये दोनों रुक जाते थे ता के मैं पास आ सकू।आज भी यात्री कम और नेपाली ज्यादा मिल रहे थे।जितना उत्साह हमे यात्रा पर ऊपर जाते हुए होता है वापिस आते हुए उतना नही रहता ।अब चलते चलते कुंशा भी आ गया पर यहाँ रुक कर क्या करना था इस लिए चलते रहे।अब वो दोनों लोकल लड़के और बब्बू आगे निकल गए काफी आगे ।अक्षय थोड़ा ही आगे चल रहा था और मैं तो रेंग ही रह था जो मेरी स्पीड थी उसे चलना तो बोल नही सकते इस लिए रेंग रहा था लिखा। अब भीम तलाई आ गया यहाँ पर दो कुत्ते हमारे साथ चल रहे कुत्ते पर भोकने लगे मुझे लगा अब इनकी लड़ाई होगी। अगर वो कुत्ते मेरी तरफ आ गए तो मैं क्या करूँगा जिस हालत में हूँ भाग भी नही सकता।लेकिन ये आपस मे ही भोंकते रहे  ।भीम तलाई के बाद एकदम सीधी चड़ाई आ गई ।अक्षय बोला रुपिंदर भाई अब तो चड़ाई आ गयी और आप को तो चड़ाई अच्छी लगती है अब तो खुश हो पर अब मेरी जो हालत थी उस हिसाब से चड़ाई भी मुझे बुरी लग रही थी।एक पंगा यहाँ पर ये भी था हम सही रास्ते की जगह शॉटकट पर चल पड़े ।ये हमने जानबूझकर नही किया था बल्कि गलती से हो गया।रास्ते मे हल्की सी स्लाइडिंग की वजह से पत्थर ही पत्थर थे ।ये स्लाइडिंग पहले हुई होगी कभी। चड़ते समय पथर भी सरक रहे थे ।अब बब्बू भी काफी देर से  दिखाई नही दे रहा था वो दोनों लड़के भी आगे चले गए थे। धूप की वजह से गर्मी भी बहुत हो गई थी । एक दो जगह तो हमे पता ही नही चला कि अब किस तरफ जाए अक्षय आगे था तो वो मुझे पूछता भाई अब किधर जाए तो एक बार रुक कर आराम से देखते फिर कोई निशान दिखता तो उस तरफ चलते। अब हम सही रास्ते पर आ गए थे ।जब भी कोई नेपाली मिलता तो उस से पूछते भाई काली घाटी कितनी दूर है तो वो बोलता 10 मिनेट में पहुँच जाओगे पर हम एक घंटे में पहुंचे। जब काली घाटी पहुंचे तो बब्बू और जोशी वही थे । यहां पर  चाय पी और साथ मे कल का बचा थोड़ा सा नमकीन भी खाया। जहाँ पर दुकान वाले से जीजा जी के बारे में पूछा तो उसने बताया वो तो कल सुबह ही थाचडू चले गए थे।हम यहाँ थोड़ी देर आराम करने के बाद चल पड़े ।आराम करने की वजह से अब कुछ अच्छा लग रहा था और रास्ता भी बडिया था हम तेजी से नीचे उतरने लगे यहाँ  भी ये तीनो मेरे से आगे निकल गए मैं अपनी स्पीड से चलता रहा ।काली घाटी से थाचडू तक का रास्ता ज्यादा मुश्किल नही है ना तो जाते समय न आते समय। कुछ देर बाद थाचडू भी आ गया तीनो उसी दुकान में बैठे थे जहाँ जाते समय हम अपना सामान छोड़ कर गए थे। यहाँ पर हमने थोड़ा आराम किया जो सामान छोड़ा था उसे उठाया और जीजा जी के बारे में पूछा तो दुकान वाले ने बताया वो तो कल ही नीचे चले गए थे।तभी जीजा जी का फ़ोन भी आ गया वो तो जाओ से भी चले गए थे पूछ रहे थे रामपुर रुकू जा न मैंने बोला आप निकल लो हम आ जायेंगे।
यहां पर भी जोशी ने अपना पागलपन दिखा दिया जो लड़के हमे ऊपर मिले थे उन्हें मैंने एक टेंट 2500 का बेच दिया था वो दो टेंट मांग रहे थे एक मेरा और बब्बू का था एक जोशी का  जोशी भी बेचने के लिए मान गया था जिस दुकान में हम अब रुके थे उसने भी टेंट मांग लिया पर वो एक टेंट ही ले रहा था ।जोशी ने उसे 2000 में दे दिया जब के मैं 2500 में बिकवा रहा था। तभी वो लड़के बोले हम एक टेंट नही लेंगे हम दोनों लेंगे ।फिर बड़ी मुश्किल से जोशी का वो टेंट वापिस लिया और मैंने फिर जोशी को बोला भी भी जब हमारी बात उन लड़कों के साथ हो गयी तो तुमने इस दुकान वाले को टेंट क्यों बेचा वो भी 500 कम में और ऊपर से उन लड़कों के सामने अब वो लड़के भी 2000 का टेंट मांगेंगे। चलो दुकान वाले से टेंट वापिस लेकर हम नीचे की और चल पड़े। सबसे आगे जोशी फिर बब्बू फिर वो लड़के फिर अक्षय और आखिर में मैं चल रहा था। 
आज से पहले मुझे कभी घुटनो में इतनी तकलीफ नही हुई थी मैने दो बार अमरनाथ यात्रा बालटाल और पहलगाम दोनो तरफ से मणिमहेश और पिछले साल किन्नर कैलाश की थी वैष्णोदेवी भी बहुत बार गया हूँ ।इस बार शायद थाचडू की चड़ाई पर जीजा जी काऔर अपना बैग उठाने के कारण ये हाल हुआ है। थाचडू के बाद पेड़ फिर शुरू हो गए थे इस लिए धूप नही लग रही थी ।अब ये सभी मेरे से काफी आगे निकल गए थे मैं धीरे धीरे चल रहा था। अब मुझे न कोई चढ़ता हुआ मिल रहा था न कोई उतरता हुआ मैं बस अकेला चल रहा था मेरे पास सिर्फ 300 ml की बोतल थी पानी की ।
  मुझे 1 घण्टे से ज्यादा हो गया था चलते हुए इस जंगल मे बिल्कुल अकेला उसके बाद मुझे कुछ नेपाली उतरते हुए मिले मैंने उनसे पूछा बराटी नाला कितनी दूर है वो बोले 1 घंटे में पहुंच जाओगे। करीब करीब 1 घंटे बाद मुझे दो आदमी दुकान के लिए टेंट लगाते हुए मिले उनसे फिर पूछा बराटी नाला कितनी दूर है बोले 1 घण्टे से ज्यादा लगेगा भाई बराटी नाला भी चल  रहा है क्या एक घण्टे पहले भी यही उत्तर मिल था मुझे वो भोले आप की जो स्पीड है उस हिसाब से आप एक घण्टे में भी मुश्किल से पहुंचोगे । प्यास बहुत लग रही थी पानी सिर्फ 100ml बचा था सोचा जब तक बिना पानी के चल सकता हूँ तब तक इसे बचा कर रखूंगा ।
शाम हो गयी थी अब तो सिर्फ  पंछियो की आवाजें ही सुनाई दे रही थी ।दिल कर रहा था यही किसी दुकान में सो जाऊ सुबह चला जाऊंगा एक दो दुकाने मिली भी पर पैसे तो बैग में थे और बैग वो लड़को के पास था एक बार सोचा अपना छोटा फ़ोन दे दूंगा और कहूंगा भाई इस के बदले में एक रात गुजार लेने दो आपके टेंट में। फिर  सोचा थोड़ा और चल लेता हूँ फिर देखूंगा ।अब तो कोई नेपाली जा लोकल भी मिलने बन्द हो गए थे मेरी स्पीड बहुत कम हो गई थी ।तभी दो लड़के आते हुए मिले आते ही उन्होंने पानी मांगा मैंने अपनी बोतल दे दी वो बोले आप क्या पिओगे बराटी नाले तक पानी नही मिलेगा और आप 2 घण्टे तक नही पहुंच सकते अरे भाई पानी नही मिलेगा ठीक है पर ये क्या बोल दिया अभी और दो घंटे लगेंगे वहाँ तक ।वो बोले आप की जो स्पीड है उस हिसाब से 2 घण्टे में पहुंच जाओ तो अच्छा है अरे यार सभी मेरी स्पीड की बात क्यू करते है अब इसमें मैं क्या करूँ कैसे स्पीड बढाऊँ । चलो मैंने बोला एक घूंट छोड़ देना पानी बाकी पी लो 100-150 ml में से कितने क घूंट बनते उन्हो ने एक एक घूंट पिया एक दो घूंट मेरे लिए छोड़ दिया । मैंने इनसे अक्षय और बब्बू के बारे में पूछा वो बोले वो  आप से आधा घंटा आगे है । मतलब मेरी जिस स्पीड की वजह से मेरी दो तीन बार बेइजती हुई थी वो इतनी भी बुरी नही थी ।अब मुझे लगा थोड़ी तेजी से तो  चलना ही होगा नही तो अंधेरा हो जाएगा पर घुटनो में इतना दर्द था तेज चल ही नही पाया
 । अब हल्का सा अंधेरा होने लगा था तभी मुझे लगा आगे कोई जानवर बैठा है शायद भालू है।पहले तो मैं धीरे धीरे चल भी रहा था अब तो हालत खराब हो गई थी ।थोड़ी हिमत करके मैं चल पड़ा जब उस जगह पहुंचा तो देखा जिसे मैं भालू समझ रहा था वो तो एक पेड़ का जला हुआ तना था अब मेरी सांस में सांस आई । मैंने इस तने को देख कर सोच भी  ऊपर से किस एंगल से ये भालू लग रहा था।पर कई बार जब आप इस तरह के जंगल मे बिल्कुल अकेले चलते हो तो आप के मन मे ऐसे विचार आ ही जाते है।थोड़ा और चलने पर  एक जगह मुझे खाली टेंट लगा हुआ  मिला यहाँ रुकने के पैसे भी नही देने पड़ेंगे सोचा यही रुक जाता हूँ । फिर सोचा बब्बू और अक्षय मेरी फिक्र करेगे चलो करते है तो करने दो मैं तो यही सोऊंगा और सुबह जल्दी निकल जाऊंगा ।पर फिर भालू याद आ गया भालू याद आते ही सीधा चल पड़ा तभी मुझे हल्की सी आवाज सुनाई दी ये तो नाले के पानी की आवाज थी मतलब बराटी नाला पास ही है पर मेरी स्पीड काफी कम थी इस लिए काफी देर चलने पर नाला दिखाई नही दिया तभी फ़ोन की घंटी बजी अक्षय का था बोला कहा हो भाई मैंने कहा आधे घण्टे में पहुंच जाऊंगा ।थोड़ा ही चला था घर से फ़ोन आ गया बाते करते करते नाले के पास पहुंच गया। आश्रम से पहले एक छोटा सा मंदिर आता है उसके बाद एक पुल पार करके थोड़ा चलके आश्रम आता है पर जब इस मन्दिर के पास पहुंचा तो मुझे लगा मैं फ़ोन पर बाते करता हुआ गलत रास्ते पर आ गया जबकि रास्ता सिर्फ एक ही है ।अंधेरा भी काफी हो गया था मैंने अक्षय को फ़ोन लगाया फ़ोन नही मिला फिर बब्बू को फ़ोन लगाया उसका भी नही लगा ।मुझे याद ही नही रहा के हम इसी रास्ते से गये थे । थोड़ी देर बाद सोचा पुल पार कुछ तो होगा चलकर देखता हूँ थोड़ा चलने के बाद दूर रोशनी नजर आ रही थी पास पहुंचा तो ये बाबा जी का आश्रम था। अंदर जाते ही बब्बू और अक्षय को आवाज लगाई ये एक तरफ टेंट में बैठे थे मैं भी वही चला गया सामान रखा और इनके पास लेट गया । ये मेरे से कोई 45 मिनेट पहले पहुंच गए थे ।अभी अच्छी तरह लेटा भी नही था तभी एक आश्रम का सेवादार आकर बोला लंगर खा लो। दिल तो नही कर रहा था पर थोड़ा सा खा लेता हूँ सोच कर चला गया  ।खाना खा कर दुबारा वही आ गए लेटते ही दुबारा सेवादार बोला दूसरे कमरे में सो जाओ  यहाँ चूहे बहुत है ।बड़ी मुश्किल से खड़ा हुआ और दूसरे कमरे में चले गए वहाँ जाकर घुटनो पर मूव लगा कर गरम पट्टी बान्धी और स्लीपिंग बैग में घुस  गया ।यहाँ पर और भी काफी लोग थे इनमे से एक हरयाणा से भी था वो थाचडू भी नहीं पहुंचा था रास्ते मे से ही वापिस आ गया था ।वैसे भाई का शरीर भी थोड़ा साइज में बड़ा था इस लिए भी दिक्कत हुई होगी ।इन सब से थोड़ी देर बाते की फिर हम सो गए।
रात को नींद अच्छी आई पिछली रात नही सो पाया था इस लिए भी आज नींद आ गई थी।सुबह 5 बजे के करीब उठ कर चल पड़े जोशी भी रात यही रुका था ।आज फिर ये तीनो आगे और मैं पीछे था लेकिन आज मैं ज्यादा पीछे नही रहा आज मेरी स्पीड भी ठीक थी । सुबह जब बराटी नाले से चला था तो पानी की बोतल लेनी भूल गया था प्यास लग रही थी पर पानी नही था । आज काफी नेपाली ऊपर सामान लेकर जा रहे थे आज इनमे कुछ औरते भी थी। अब मैं सिंहार्ड  पहुंच गया यहां आज भी कोई नही था। मैं बिना रुके आगे निकल गया। थोड़ी देर बाद घर भी नजर आने लगे यहाँ पर लोग खेतो में काम कर रहे थे ।एक घर मे एक औरत छत पर खड़ी थी मैने उस से पानी मांगा उसने एक बोलत पानी दे दिया और बोली बोतल साथ ले जाओ रास्ते मे काम आएगी । थोड़ी दूर मुझे जोशी जाता हुआ नजर आया आज वो ज्यादा तेज नही चल रहा था।अब जाओ गाव भी पास ही था। आधा घंटा चलने के बाद मैं वही पहुंच गया जिस दुकान से हमने जाते समय चाय पी थी ।बब्बू ,अक्षय और जोशी यही बैठे थे। जाते ही सब सामान रखा और दुकान वाले को बेकार परांठो के लिए धन्यवाद किया ।एक एक कप चाय भी बनवा ली तब तक अपने फ़ोन चार्ज कर लिए और चाय पी कर  हम बस स्टैंड की और चल पड़े ।रास्ते मे हमे एक खुमानी का पेड़ दिखा बब्बू और अक्षय तो रुके नही पर मैंने और जोशी ने डण्डे से कुछ खुमानी तोड़ ली कुछ खा ली और कुछ उन दोनो के लिए रख ली।बस स्टैंड पर ही उन लड़कों की दुकान थी जिनको हमने टेंट देने थे।पर अभी  यहाँ पर उनके पिता जी थे तो उन्हें ही टेंट चैक करवा कर पैसे लिए ।थोड़ी देर बाद ही बस भी आ गई ।अब एक बार फिर भोले को नमस्कार किया और बस में चड़ गए बस में भीड़ बहुत थी कन्डक्टर बोला बाघीपुल जा कर बस खाली हो जाएगी और हमे बघिपुल तक खड़े खड़े ही सफर करना पड़ा।रामपुर आ कर जोशी तो सीधा चंडीगड़ वाली बस में बैठ गया मैं और बब्बू नहाना चाहते थे इस लिए एक कमरा लिया यही पर अक्षय भाई से पैसो का हिसाब किया और अक्षय  भी चला गया ।हम दोनों पहले नहाए फिर खाना खाया और बस मे बैठ गए रात को 2 बजे के करीब चंडीगड़ और वहां से 5 बजे वाली बस पकड़ कर 8 बजे घर पहुंच गए



Thursday, 26 July 2018

श्रीखंड कैलाश यात्रा भाग -3 भीम द्वारी से दर्शन करके वापिस भीम द्वारी

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रात को नींद अच्छी आई ।रात को हम तीनों एक ही टेंट में सोए थे टेंट दो लोगो वाला था पर सोए तीनो पर नींद इतनी अच्छी आई थी एक बार सोने पर पता ही नही चला। सुबह अलार्म बजा फिर आँख खुली। सुबह उठ गए तो सबसे पहले टेंट पैक किया और उसी दुकान में रख दिया जिस में रात को मैगी खाई थी। जब चाय बनाने को बोला तो दुकान वाले ने मना कर दिया बोला अभी नही बना सकता ।पर रात को तो बोला था बना दूंगा और कोई दुकान भी नही थी यहाँ ।चलो कोई बात नही बिन चाय काम चला लेंगे और फिर हम चल पड़े भोले के दर्शन करने ।अभी अंधेरा था तो टोर्च को भी काम मे लिया गया ।पास में ही पानी का नाला बह रहा था काफी तेज पानी था शोर भी काफी हो रहा था ।थोड़ी दूर जा कर इसे पार कर  दूसरी तरफ जाना पड़ता है।अब चड़ाई भी शुरू हो गई बिकुल सीधी यहाँ रास्ता भी थोड़ा पथरीला था।हमारे आगे भी कोई जा रहा था दूर से टॉर्च की रोशनी दिख रही थी ।हम तीनों भी आगे बढ़ते रहे ।ठंड की वजह से सांस भी फूल रही थी। थोड़ी देर बाद थोड़ी समतल जगह आई  ,और यहाँ पर जोशी टेंट में रुका हुआ था ।हमे लगा था ये पार्वती बाग में मिलेगा पर ये तो यहाँ पड़ा है अगर यही रुकना था तो आधा किलोमीटर पहले क्या दिक्कत थी।सबसे पहले इनसे पूछा आप भीम द्वारी क्यो नही रुके तो बोले आप सुबह बोल रहे थे पार्वती बाग में रुकेंगे मुझे लगा आप आ जाओगे ।उनको सुबह वाली बात याद रह गई पर दोपहर वाली याद नही रही ।वैसे सच ये था कि वो नही चाहता था हम उनके पास रुके ।अगर उनके पास रुकते तो हम में से एक उनके टेंट में सोता और वो ये नही चाहता था ।टेंट तो बहुत बड़ी बात है उस ने तो थाचडू की चड़ाई चड़ते समय बब्बू को झूठ  बोल दिया के मेरे पास तो पानी नही है बाद में जब खुद पानी पीने लगा तो बब्बू ने पूछा अब पानी कहा से आया तो बोला पी लो पानी । हमारी पहली गलती इस यात्रा में लंगर लगने से एक महीना पहले आने की थी और दूसरी जोशी को साथ लाने की थी । हमने जोशी को बोल दिया जल्दी आ जाना हम आगे जा रहे है ।थोड़ी देर बाद उजाला भी होने लगा। अब काफी दूर तक दिख रहा था और वो लोग भी दिखने लगे जो हम से आगे जा रहे थे वो चार थे। हम भी चार तो अभी तक कुल 8 लोग ही दर्शन के लिए जा रहे थे ।ठण्ड बहुत थी हाथ सुन हो रहे थे ।मेरे और अक्षय के पास तो दस्ताने भी नही थे ।मैने अपने बैग में से अपनी गर्म जुराबें निकाल ली एक अपने हाथ मे डाल ली एक अक्षय को दी ।मुझे तो काफी आराम मिला पर अक्षय को डंडा पकड़ने में दिकत थी तो उसने जुराब वापिस कर दी। हम सभी साथ में ही चल रहे थे जोशी भी आ गया था।अब वो चार जो हम से आगे थे हम उनके पास पहुंच गए थे ।उनमें से 3 लड़के और एक लड़की थी वो रेणुका जी हिमाचल से थे। काफी तयारी के साथ आये थे खाने का समान भी भी काफी था और हमारे पास जो सामान था वो भी हम भीम द्वारी छोड़ आए। थोड़ा सा सामान ही साथ लाए थे ।अब कभी हम आगे निकल जाते कभी वो चारो ।आज ठंड काफी थी ।हम चुप चाप ही चल रहे थे बाते करने का  दिल भी नही कर रहा था ।अभी तक ज्यादा रुके भी नही थे। कुछ देर बाद पार्वती बाग भी आ गया। जहाँ पिछले साल लगे टेंटो के निशान भी थे पर इस साल अभी तक कोई टेंट नही लगा था ।यात्रा समय यहाँ लंगर और प्राइवेट टेंट लगते है ।हम बिना रुके चलते रहे थोड़ी देर बाद रास्ता भी पथरो वाला आ गया। चारो तरफ पथर  पानी की सिर्फ एक छोटी सी बोतल थी हमारे पास उसी से काम चलाना था ।सारे रास्ते मे हमने सोच लिया था जो मर्जी हो जाये जोशी से पानी नही मांगना है ।हमारे साथ जो कुत्ता नीचे से आया था वो अभी भी हमारे साथ साथ चल रहा था ।एक कुत्ता उन हिमाचल वालो के साथ भी था उनके कुते के मुकाबले हमारा कुत्ता शरीफ था ।नीचे से लेकर अब तक एक बार भी नही भौंका था और जो भी हमने खाने को दिया वो आराम से खा लिया था ।अब पहली बार इसे अपनी पसंद का खाना मिला था इन पथरो में दोनों कुत्तो ने एक चूहा पकड़ लिया था ।भूख तो अब हमें भी लग रही थी ।तो  हमने भी अपना बैग खोला इसमे अक्षय भाई का लाया हुआ नमकीन और एक दो बिस्कट के पैकेट थे चार पांच मेरे पास चॉकलेट थे उसमे से ही थोड़ा थोड़ा खा लिया ।हिमाचल वालो से भी पूछा ले लो भाई पर उन्होंने मना कर दिया ।जो हमारे पास नमकीन था उसमें मिर्च थोड़ी ज्यादा थी और पानी हमारे पास कम था । खा पी कर हम फिर आगे चल पड़े काफी देर पथर आते रहे इन पथरो पर चलना थोड़ा मुश्किल होता हैं अगर थोड़ी सी भी लापरवाही की तो चोट लग सकती है या पैर में मोच भी आ सकती है।पर अब हमे थकावट नही हो रही थी इस लिए रुक कर आराम करने की जरूरत नही पड़ रही थी। अब हमें पीछे से कोई आता दिखाई दिया कोई पहाड़ी ही होगा तभी बड़ी तेजी से आ रहा था । अब दिल कर रहा था ये पथर जल्दी खत्म हो और थोड़ा तेज चले ।दूर रास्ते पर बर्फ भी नजर आ रही थी ।थोड़ी देर बाद वो जो पीछे से आ रहा था वो भी हमारे पास आ गया ये तो रोहित था जो हमे कल भीम द्वारी से थोड़ा पहले मिला था ।ये नैनसरोवर पर नहाने आया था ।इतनी ठंड में यहाँ नहाने की हिम्मत हर कोई नहीं कर सकता ।हमारे तो यहाँ ऐसे ही हाथ सुन हो रहे थे और ये यहाँ नहाने आया है ये सोच कर मुझे तो और भी ठंड चड़ गई।थोड़ी देर में नैन सरोवर भी आ गया और बर्फ़ भी। यहाँ से आगे काफी दूर तक बर्फ ही भर्फ़ नजर आ रही थी ।अब यहां पर थोड़ी देर रुक कर आराम करेगे और कुछ खायेगे ।यहाँ पहुंचते ही अक्षय तो फ़ोटो खीचने लगा और मैंने नमकीन निकाल लिया भूख बहुत लगी थी। हिमाचल वालो के पास ब्रैड और पीनट बटर था मैं भी उनके पास बैठा था मुझे उम्मीद थी वो एक बार जरूर पूछेगे आप भी ले लो ब्रैड और मैंने सोच रखा था एक बार पूछ लेने दो मना मैं भी नहीं करूंगा पर उन्होंने  पूछा ही नहीं हाँ उन्होंने अपने कुत्ते को भी  ब्रैड दिया अब मुझे उस कुत्ते से जलन हो रही थी।अब अक्षय और बब्बू भी फ़ोटो खिंच कर आ गए थे हमने भी अपना नमकीन और बिस्किट खाए और चल पड़े आगे ।अब पथर नही थे बर्फ़ थी बर्फ़ भी ताजी गिरी हुई थी कल गिरी होगी ।कोई निशान नही था किसी के भी पैरो का ।जब हम पैर रख रहे थे तो पैर थोड़े से बर्फ़ के अंदर जा रहे थे ।यहाँ पर हम ने रोहित को हमारे साथ आगे जाने के लिए भी मना लिया ।वो बोल रहा था मेरी दादी गुस्सा होंगी पर हम ने कहा हम समझा देंगे तुम्हारी दादी को तो रोहित मान गया। जहाँ पर बब्बू ने अक्षय से पूछा भाई सुस्त क्यू हो ,लग तो मुझे भी सुसत रहे थे पर मुझे लगा थकावट होगी इस लिए नही पूछा पर उसने बोला ऐसी कोई बात नहीं है। थोड़ी देर में बर्फ भी खत्म हो गई लेकिन चड़ाई जारी रही ।मेरे घुटने में थोड़ा दर्द होने लगा था जैसे जैसे ऊपर जा रहे थे दर्द भी बढ़ता जा रहा था ।बैग में दवाई देखी तो वो भीम द्वारी पर ही रह गयी थी दूसरे बैग में ।जब लगा अब ज्यादा तकलीफ है तो हिमाचल वालो से पेन किलर मांग ली उन्होंने एक गोली दे दी ।मैंने सोचा खाना भी मांग लेता तो शायद वो भी दे देते। पर अब सिर्फ गोली से काम चला लेते है गोली खा कर काफी आराम मिला ।अब फिर कुछ स्पीड बड़ाई गयी। हल्की हल्की भर्फ़ गिरने लगी थी।मैंने पहली बार भर्फ़ गिरते देखी थी अच्छा लग रहा था। रास्ता तो पहले ही मुश्किल था अब एक ग्लेशियर भी आ गया। मुश्किल ये थी बर्फ़ ताजी गिरी हुई थी जिस से पैर अंदर दसने का डर था और एक तरफ खाई भी थी। पर सब ने धीरे धीरे इसको पार कर ही लिया ।हिमाचल वालो में से एक लड़के को चड़ने में काफी दिक्कत हो रही थी रास्ता भी काफी मुश्किल था बर्फ  भी ज्यादा थी ।और अब बर्फबारी भी ज्यादा होने लगी  थी ।अब वो लड़का आगे जाने से मना करने लगा ।तो वो सभी वापिस जाने की सोचने लगे पर हमारे कहने पर एक कोशिश और करने के लिए मान गए ।रास्ता कभी बर्फ पर तो कभी पथरो का आ जाता था ।थोड़ी दूर ही गये थे कि हिमाचल वालो ने तो मना कर दिया आगे जाने के लिए मौसम भी अब काफी खराब हो गया था ।अब हम भी क्या कर सकते थे इसमे । उनको वही छोड़ कर हम आगे चले गए वो अभी वापिस नही गए थे एक पत्थर के नीचे थोड़ी जगह थी वही हमारे वापिस आने तक रुकेंगे फिर हम इक्कठे वापिस जाएगे।हम थोड़ा सा आगे गए तो एक जगह सीधी चड़ाई आ गईं ज्यादा नही थी कोई 30 मीटर के करीब होगी। जहाँ पर जोशी बोला मैं आगे नही जाऊंगा कारण इस चड़ाई पर बर्फ बहुत थी और दोनों तरफ खाई थी इस लिए वो डर गया था।ज्यादा हमने भी जोशी को नही कहा कि आगे चलो।अब हम 4 लोग बचे थे मैं,बब्बू ,अक्षय और वो लड़का रोहित। रोहित तो ऐसे चड़ गया जैसे समतल रस्ते पर जाते है फिर बारी आई बब्बू की जब भी वो ऊपर चड़ने लगता फिसल कर नीचे आ जाता कम से कम दस बार कोशिश की पर बब्बू चड़ न सका ।फिर रोहित को हमने बोला अपने मफलर से खींच ले पर वो बोला मैं छोटा हूँ आप को कैसे खींचूंगा कही मैं भी नीचे खाई में ना गिर जाऊ।वापिस हम जाना नही चाहते थे। फिर एक दो बार कोशिश करने पर बब्बू चड़ गया अब अक्षय बोला मैं भी आगे नही जा पाऊंगा पर मैंने उसे समजाया थोड़ी कोशिश करो हम चड़ जायेगे ।चार पांच बार फिसलने के बाद मैं भी चड़ गया अक्षय ने भी कोशिश की पर वो बार बार फिसल रहा था। अब उस ने साफ मना कर दिया भाई मैं नही जा सकता। मुझे यकीन नहीं हो रहा था कि अक्षय यहाँ से वापिस चला जायेगा। अब हम तीन ही रह गए थे। रोहित आगे चला गया था और बब्बू मुझे आवाज लगा रहा था जल्दी करो मौसम खराब हो रहा है और मैं अक्षय को वही छोड़ कर आगे बढ़ गया ।रास्ता काफी मुश्किल था बड़े-बड़े पथरो को पकड़ कर चढ़े।थोड़ा आगे गए तो फिर वैसी ही बर्फ और चड़ाई आ गई पर इस बार इतनी मुश्किल नही हुई पर पैर बर्फ में दस रहे थे जिस से बर्फ़ जूतों के अन्दर जा रही थी ।मैंने एक जगह पर पीछे मुड़कर देखा तो चारो हिमाचली और अक्षय ,जोशी वापिस जा रहे थे और ।मैं सोच रहा था कितनी पास आकर ये लोग वापिस लौट गए ।हम थोड़ा सा चले और भीम शिला आ गया ।जहाँ पर बड़े बड़े पत्थरों पर भीम ने कुछ लिखा था मेरी समझ मे तो कुछ नही आया कोशिश तो बहुत की मैंने ।बब्बू ने फिर आवाज लगा दी जल्दी करो, यार एक तो बब्बू को जल्दी बहुत रहती है। मैं आगे चल पड़ा ।इस रास्ते पर काफी बर्फ थी तो मैं  वीडियो बनाने लगा  तभी मेरा पैर फिसल गया एक तरफ खाई थी वो तो शुक्र है बच गया ।बब्बू ने जब देखा तो वो गुस्सा हो गया और बोला वीडियो के चक्कर मे मर जायेगा सीधा होकर चल और मोबाइल जेब मे डाल लें ।अब शिला साफ नजर आ रही थी। रोहित हमसे पहले पहुंच गया था वो अभी पूजा कर रहा था ।शिला से थोड़ा पहले एक पथर पर हमने अपना सामान रखा और बैठ गए समय देखा 12:45 ।हमने सोचा 1:15 पर ही पूजा करेगे।काफी थक भी गये थे ।बहुत देर से पानी नही पिया था जो पानी था कब का खत्म हो गया था मैंने तो कई बार बर्फ खा कर ही काम चलाया था ।पानी तो यहाँ भी नहीं था पर एक पथर से पानी की बूंदे टपक रही थी खाली बोतल को उसके नीचे रख दिया जाते समय उठा लेंगे थोड़ा पानी तो मिलेगा। फिर अपने जूते उतारे बर्फ से ही हाथ धोए ओर चल पड़े भोले को गले से लगाने ।हमारी आंखों से आंसू आ रहे थे खुशी के आंसू ।हम हैरान थे इतने लोगो मे से भोले ने हमे ही दर्शन दिए अगर ताकत की बात करे तो अक्षय और जोशी दोनो मेरे से ज्यादा दम रखते थे चड़ने का। पूरे रास्ते वो मेरे से आगे आगे ही आये थे ।अगर मानसिक ताकत की बात करे तो मैं और बब्बू दोनो काफी मजबूत है ।पर पिछले साल अक्षय ने अकेले किन्नर कैलाश की यात्रा की थी पर इस बार पता नही क्या हो गया था ।बब्बू ने तो नैन सरोवर से ही बोल दिया था आज अक्षय के चेहरे पर पहले वाली चमक नही है।शिला के सामने हम कुछ देर ऐसे ही खड़े रहे ।पहले मौसम थोड़ा खराब था जबसे यहाँ पहुंचे थे कड़क धूप निकल आई थी ।नीचे बर्फ थी पर जब किसी पथर पर पैर रखते थे तो पथर थोड़े गर्म लग रहे थे धूप की वजह से।चारो तरफ दूर दूर तक पहाड़ साफ नजर आ रहे थे ।तभी रोहित बोला जल्दी करो वापिस भी जाना है तो हमने अपने बैग से पूजा का सामान निकाला हम तो घर  से कुछ लेकर नही आये थे पर जीजा जी ने दिया था उसी से पूजा की फ़ोन पर आरती और महामृत्युंजय मंत्र चलाये।जब हम पूजा कर रहे तो हमने देखा समने कीसी ने 4 कच्चे आम चढ़ाए हुए थे भोले बाबा को कोई आया होगा एक दो दिन पहले ।हम ने सोचा भोले बाबा की जगह उनके बच्चे ये खा ले तो ज्यादा अच्छा है इस लिए भोले का प्रशाद समाज कर हमने 3 आम उठा लिए।हम तीनो को एक एक आ गया और एक भोले बाबा के लिए छोड़ दिया।थोड़ी देर फ़ोटो खिंचे आस पास की पहाड़ियां देखी ।दिल तो वापिस जाने का कर ही नही रहा था। कार्तिकेय चोटी भी साफ दिख रही थी अक्षय का बहुत मन था वहाँ जाने का ।हमे अब एक घंटा हो गया था यहाँ आये हुए अब एक बार और भोले को नमस्कार किया   और भोले से फिर दुबारा बुलाने का वादा लेकर वापिस चल पड़े। अपना सामान उठाया जूते पहने जो बोतल रखी थी पथर के नीचे उसमे 150 ml पानी मुश्किल से भरा था ।अभी प्यास नही लगी थी तो बोतल को बैग में रखा और भोले का जयकारा लगा कर नीचे की और चल पड़े ।अब दिल मे जो खुशी थी वो शब्दो मे बया नही की जा सकती ।जितनी देर हम ऊपर रुके थे उतना समय धूप थी जब वापिस चले तो फिर से मौसम खराब होने लगा। चड़ते समय जिस जगह बर्फ पर कम दिक्कत हुई थी वहां पर हम बहुत बार फिसले। बब्बू तो एक दो बार फिसला मैं कम से कम पांच छे बार फिसला पैंट भी थोड़ी लूस हो गयी थी जा फिर मैं थोड़ा पतला हो गया था पहाड़ चड़ कर ।जब फिसल कर गिरता तो बर्फ पैंट में कमर के पास से अंदर घुस जाती जूतो में भी चली जाती थी।इस थोड़ी सी जगह से उतरने पर ही नानी याद आ गई ।मेरा तो पिछवाड़ा भी गिर गिर कर दर्द करने लगा था।मुझे पहाड़ चड़ने से ज्यादा  उतरने में दिक्कत हो रही थी ।रही सही कसर मौसम ने पूरी कर दी हल्की हल्की भर्फ़ भी पड़ने लगी। अभी तक तो रोहित हमारे साथ चल रहा था पर भीम शिला के पास आकर वो बोला मैं अब जल्दी नीचे उतरूंगा तो हमने भी उसे नही रोका ।बब्बू आराम से चल रहा था उसे कोई दिक्कत नही हो रही थीं ।थोड़ी देर बाद बर्फ भी ज्यादा गिरने लगी जैसे जैसे हम नीचे उतर रहे थे भर्फ़बारी भी तेज हो रही थी ।थोड़ी देर बाद तो धुन्ध भी छा गई रास्ता भी बड़ी मुश्किल से नजर आ रहा था ।मैंने बब्बू को बोला भाई पास ही रहना ज्यादा आगे मत निकल जाना।थोड़ी देर ऐसे ही चलते रहे । अरे ये क्या अब तो भर्फ़ की जगह ओले गिरने लगे ।जिस रास्ते पर हमें चड़ते समय पथर दिख रहे थे अब सिर्फ बर्फ़ ही बर्फ़ थी न कोई रास्ता नजर आ रहा था न कोई पथरो पर लगा पेंट का निशान ।मेरे दोनो घुटनो में भी बहुत दर्द हो रहा था ।सुबह से हमे 4 हिमाचली और रोहित के इलावा और कोई ऊपर आता जा नीचे जाता नही मिला पर दोनों कुत्ते अब भी हमारे साथ ही चल रहे थे ।मतलब आज इन दोनों कुत्तो के इलावा हम तीन लोगों ने ही दर्शन किये थे ।रास्ता अब और भी ज्यादा मुश्किल हो गया था बर्फ़ पर पैर फिसल रहा था कही कही तो बैठ कर ही उतरना पड़ा ।मुझे घुटनो के दर्द के कारण बैठने में भी बहुत मुश्किल हो रही थी ।एक जगह आ कर बब्बू बोला हम नैन सरोवर नही जायेगे दूसरी तरफ से शॉटकट मारेगे ।मैं बोला भाई कही से भी ले चल पर जल्दी ले जा अब चला नही जा रहा ।इस रास्ते पर बर्फ कही कही तो इतनी होती थी घुटनो तक पैर अंदर चला जाता बड़ी मुश्किल से उतर रहे थे ।ऊपर से बर्फ की जगह ओले पड़ रहे थे ।वो तो शुक्र था भोले का ओले छोटे थे नही तो और भी मुश्किल हो जाती। थोड़ी देर बाद फिर से पथर आ गए अब थोड़ा आराम मिला नही तो बर्फ़ पर चल चल कर हालात खराब हो गई थी ।जब तक पथर रहे स्पीड भी ठीक रही जब पथर हटे स्पीड फिर कम हो गयी। बब्बू मेरे आगे आगे तेजी से चला जा रहा था और मुझे उसकी वजह से तेज चलना पड़ रहा था ।मैं कब से भोले से दुआ कर रहा था ये ओले बन्द हो जाए अब भोले ने मेरी सुन ली पर अब ओले की जगह बारिश होने लगी हे भोले बारिश से तो ओले ही अच्छे थे ।आज से पहले मैंने बर्फ़ पड़ती नही देखी थी और आज इतनी देख ली फिर दुबारा कभी देखने की इच्छा भी नही रही। ये बर्फ़ सिर्फ शिमला जा मनाली में  ही गिरती हुई अच्छी लगती है। यहां इसने हमारी हालत खराब कर दी अब बारिश ने उस से भी ज्यादा बुरी हालत कर दी । ठंड भी बढ़ गयी थी मेरे हाथ सुन्न हो गए थे होंठ भी नीले हो गए थे।अब चलने का बिल्कुल भी मन नही कर रहा था। दिल कर रहा था यही सो जाऊ जो होगा देखी जाएगी। पर फिर सोचा अब इतनी ठंड है तो रात को क्या हाल होगा ।बब्बू अब ओर ज्यादा दूर निकल गया था मैं भी थोड़ा तेज चलने लगा। पार्वती बाग के पास आकर मैं दो तीन बार गिरा एक बार तो इतनी जो से गिरा पिछवाड़ा सुन्न हो गया ।अब बारिश की वजह से कीचड़ हो गया था ।पैंट भी गिरने की वजह से कीचड़ से भर गई थी ।जूतो में मिट्टी लग गई थी जिस से ग्रिप नही बन रहा था बार -बार फिसल रहा था। अगर हम यात्रा के समय आए होते तो पार्वती बाग में टेंट होते और हम यही सो जाते पर अब तो भीम द्वारी जाना ही पड़ेगा और कोई रास्ता भी नही था ।पार्वती बाग के बाद रास्ते मे फिसलन हो रही थी तो मैं सही रास्ते को छोड़ पास में घास पर चलने लगा। घुटनो में इतना दर्द था मै बिल्कुल धिरे धीरे से चल रहा था और बब्बू आज मिल्खा सिंह बन रहा था पास होता तो उसे बोलता भाई आगे निकलने से कोई गोल्ड मैडल नही मिलने वाला । वो अब काफी आगे निकल गया था ।मुझे दूर दिखाई दे रहा था पर मैं आराम आराम से ही चल रहा था करता भी क्या तेज चला ही नही जा रहा था। अब हल्का हल्का अंधेरा भी होने लगा था और भीम द्वारी अभी काफी दूर था ।अब मुझे बब्बू दूर एक पथर पर बैठा दिख रहा था वो मेरा इंतजार कर रहा होगा क्योंकि बैग उसके पास था और टोर्च उसमे थी ।करीब 1 घंटे बाद मैं बब्बू के पास पहुंचा अंधेरा हो गया था ।जब मैं बब्बू के पास पहुँचा तो देखा जोशी वही टेंट लगा कर सो रहा था। अजीब पागल इंसान है आज तो उसके पास समय था आगे जाने का फिर भी यही पड़ा है ।हम बिना रुके आगे चल पड़े अब बब्बू और मैं साथ साथ ही चल रहे थे। अब फिर एकदम  सीधी डलहान आ गई पास में ही पार्वती झरना था। इस थोड़ी सी उतराई में मेरे घुटनो की बैंड बज गई ।थोड़ी देर में हम ये डलहान उतर गए। अब फिर उस नाले को  पार किया ।अब रास्ता प्लेन ही था तो हम तेजी से चलने लगे और भीम द्वारी उसी दुकान में पहुंच गए जहाँ सुबह समान रखा था ।अक्षय का पता किया तो वो आगे चला गया था रोहित की दुकान पर गया होगा पक्का ।वो चारो हिमाचली यही रुके थे उनसे फिर एक बार पेन किल्लर ली धनयवाद किया और हम आगे चल पड़े थोड़ी देर में हम रोहित की दुकान पर पहुंच गए अक्षय यही पर था। और रोहित सो रहा था उसकी दादी ने बताया आज पहली बार बिना खाय सोया है थक गया होगा। हमने अपने कपड़े उतारे पूरे गीले हो गए थे ठंड बहुत लग रही थी और भूख भी ।बब्बू के पास तो बैग में और कपड़े भी थे उसने बदल लिए। मेरे पास सिर्फ शर्ट थी वो पहन ली नीचे सिर्फ़ कच्छा बदल लिया।चूल्हे के पास बैठ कर राजमा चावल खाएं बहुत टेस्टी बने थे थोड़े और लिए पेट भर गया पर मन नही भरा। एक एक कप चाय पी और चार पांच रजाई ले कर सो गए थकावट इतनी थी कि अपने स्लीपिंग बैग भी नही उठाए। रात को मुझे ठंड बहुत लग रही थी जब रात को करवट बदलता था तो रजाई ऊपर उठ जाती थी जिससे और ज्यादा ठण्ड लगती सारी रात में मुश्किल से 1 घंटा नींद आई होगी।बाकी बाते अगले भाग में
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 ये है भीम शिला इनपे भीम ने लिखा हुआ है


 यात्री ऐसे घर बना देते हैं

Friday, 20 July 2018

श्रीखंड कैलाश यात्रा भाग-2 थाचडू से भीमद्वारी

पिछले भाग में आप ने पड़ा कैसे हम संगरूर से थाचडू पहुंचे अब आगे पढ़िए पर पहले कुछ फोटो देख ले वैसे ये सभी फ़ोटो अक्षय जी ने खिंची थी

काली घाटी के बाद ये उतराई आती है

थाचडू से थोड़ा पहले
रात को नींद ठीक ठाक आई, रात को हल्की बारिश भी हुई जिस से ठंड भी बढ़ गयी थी ।रात को कुत्ता टेंट के साथ घिसने लगा एक बार तो मैं डर गया पता नहीं कौन सा जानवर आ गया बाद में पता चला ये तो अपना साथी ही है।वैसे अगर और कोई जानवर होता तो ये बोक्ता जरूर। सुबह सब जल्दी उठ गए थे ।यहाँ तक फ़ोन का नेटवर्क बडिया आ रहा था घर पर रात को ही फ़ोन कर दिए थे सब ने ।उठने के बाद सबसे पहले समान पैक किया फिर ब्रश किया सभी ने । खाना कही आगे चल कर अगर कोई दुकान मिली तो वही खायेगे नही अपना बना लेंगे। ट्रेकिंग पर जाते समय अगर आप सब कुछ अपने साथ लेकर जाते हो मतलब खाना, टेंट और स्लीपिंग बैग तो आप को कोई टेन्सन नही होती आगे खाने और रहने की पर एक नुकसान भी होता है आप अगर पोटर नही करते हो तो आप को बजन भी ज्यादा उठा कर चलना पड़ता है।मैं कल अपना और जीजा जी का मिला कर कोई 25 किलो वजन उठा कर लाया था ।अब हम  आगे की और चल पड़े ।रात को जो पानी कुत्ते का जूठा होने के कारण नही पिया था अब उसी बाल्टी से पानी पी लिया और बोतल में भी भर लिया।हमे कोई अंदाज नही था कि आगे पानी कहाँ मिलेगा कल मैं तो पानी की वजह से बहुत परेशान हुआ था कल सारा रास्ता जंगल का था इस लिए धूप नही लगी वरना प्यास और भी तंग करती।  मुझे बाद में बब्बू और अक्षय ने बताया अभी थाचडू नही आया है  और चलना पड़ेगा फिर पहुचेंगे थाचडू। रात को जब टेंट में पहुंचे थे तो सोचा था थाचडू पहुच गए अब चड़ाई कम होगी पर जब पता चला अभी और चलना है थाचडू के लिए तो , तो क्या अब चलना पड़ेगा क्योंकि और कर भी क्या सकते थे। सुबह सुबह थोड़ी ठण्ड थी और रात को आराम भी किया था तो अभी ज्यादा दिक्कत नही हो रही थी चलने में ।अक्षय बब्बू और जोशी का स्टैमिना बहुत अच्छा है वो आगे निकल गए आज कौन सी नई बात है वो तो कल भी आगे ही चल रहे थे। मैं और जीजा जी पीछे पीछे चल रहे थे ।अभी भी रास्ता जंगल का ही था लेकिन आज रास्ता थोड़ा खूबसूरत था आज पेड़ तो थे पर झाड़िया कम थी।दिल लग रहा था चड़ाई करने में बीच बीच मे आगे वालो को आवाज़ लगा देता था बब्बू भी आवाज लगा देता था कभी कभी। वो भी ज्यादा दूर नही थे पेड़ ज्यादा होने के कारण वो कभी कभी दिखाई देते  थे ।कल के मुकाबले आज ज्यादा मजा आ रहा था चलने में कुछ शरीर भी आदी जो गया था चलने का । जीजा जी आज भी पीछे रह जाते थे पर आज वो अपना सामान खुद उठा कर चल रहे थे जिस का सब से ज्यादा फायदा मुझे हुआ कल ज्यादा वजन उठाने से मेरे कन्धे छिल गए थे ।जब थाचडू आने वाला था तो वहाँ से श्रीखंड शिला के दर्शन होते है सब को हुए मुझे छोड़ कर मुझे पता भी नही था कि यहां से दर्शन होते है बाकी तीनो आगे थे इस लिए किसी ने उनको बता दिया होगा । चलो आज नही हुए पर कोई बात नहीं पास से ही दर्शन करूँगा
  थोड़ा और चलने पर थाचडू भी आ गया वो तीनो तो पहले ही पहुँच गए थे ।मैं और जीजा जी 10 मिनेट बाद में पहुंच गए ।वो तीनो चाय पी रहे थे एक दुकान पर ।अभी दुकान वाले के पास दूध नही पहुचा था इस लिए काली चाय ही बनी थी ।2 कप हमारे भी बन गए चाय बहुत बढ़िया बनी थी मैंने पहली बार पी काली चाय । खाना भी था यहाँ पर ।खाने में परांठे और मैगी थे ।तो परांठो का ऑडर दे दिया दुकान वाले ने बताया आगे भी टेंट और खाना मिल जाएगा ।हम ने सोचा फिर इतना वजन क्यू उठाना तो सभी ने थोड़ा थोड़ा समान यही पर एक बैग में डाल कर रख दिया ।हमारे पास 3 टेंट थे।एक मेरा और बब्बू का एक जोशी का था और एक अक्षय  और जीजा जी का था ।सोचा एक टेंट को यही छोड़ देते है। एक मे हम तीन और एक मे दो लोग सो जायेगे।  वजन कुछ कम हो गया था अब।इतने में परांठे भी बन गए थे। जिस को जितनी भूख थी उतने खाये और एक एक कप चाय और पी ।अब काफी समय हो गया था यहाँ रुके हुए तो हम आगे  की और चल पड़े ।हम सोच रहे थे रात को पार्बती बाग रुकेंगे पर जीजा जी की वजह से थोड़ा मुश्किल लग रहा था वैसे भी दुकान वाले ने बोला था पार्वती बाग नही पहुंच पाओगे आप। वैसे  हम ने सुना था थाचडू के बाद चड़ाई थोड़ी कम हो जाती है पर चड़ाई थाचडू के बाद भी थी ।पर अब पेड़ नही थे तो दूर दूर तक दिखाई दे रहा था ।जब दूर दूर तक दिखाई देने लगता है तो ट्रेकिंग करने में मजा आने लगता है। मौसम बिल्कुल साफ था रास्ते मे कुछ यात्री वापिस आते हुए भी मिल रहे थे सभी से मैं  2 सवाल पूछ रहा था
1 दर्शन हुए और दूसरा काली घाटी कितनी दूर है और दोनों सवालो के जवाब ज्यादातर खतरनाक होते थे दर्शन दूर से हुए मुश्किल से एक दो ने कहा होगा जी हां हम शिला के पास गए बाकी सब रस्ते में से ही वापिस आ रहे थे और दूसरे सवाल के जवाब होता था काली घाटी अभी दूर है। रास्ते में एक जगह ऐसी भी आई जहाँ देखने पर लगा रास्ता कहाँ पर है ।यही पर एक पथर पर हम बैठ गए थोड़ी देर में जीजा जी भी आ गए। जब पास गए तो रास्ता दिख तो गया पर था एकदम खड़ी चड़ाई वाला पर ज्यादा लम्बा नही था । इसके बाद रास्ता ज्यादा मुश्किल नही था ।आज सुबह से ही मुझे कोई ज्यादा दिक्कत नही आई बल्कि जीजा जी को छोड़ कर किसी को भी कोई दिक्कत नही आई जीजा जी काफी पीछे रह जाते थे । इस बार मैं भी उनके लिए ज्यादा नही रुका ।रास्ता भी ठीक था कल के मुकाबले इस लिए सोचा जीजा जी आ ही जायेंगे ।अभी पहाड़ो पर घास ज्यादा हरी नही थी पर अच्छी लग रही थी दूर पहाड़ो पर पड़ी बर्फ भी दिखने लगी थी ।रास्ते मे अब चड़ाई तो थी पर  ज्यादा मुश्किल नही थी। थोड़ी देर चलने के बाद  काली घाटी भी आ गई। वो तीनो पहले ही पहुच गए थे यहाँ मोबाईल का नेटवर्क भी था ।  जोशी घर पर वीडियो कॉल कर रहा था और बब्बू फेसबुक पर लाइव था अक्षय भाई फ़ोटो ले रहे थे मैंने सब से पहले अपना सामान रखा और फिर बब्बू के पास गया सोचा  फेसबुक लाइव पर अपनी शक्ल भी दिखा दूँ। यहाँ पर माँ काली का एक छोटा सा मन्दिर बना हुआ है  वहाँ पर माथा टेका और आगे की यात्रा के लिए दुआ मांगी।जब यहाँ पर पहुंचे तो मौसम भी थोड़ा बदल गया था धुन्ध पड़ने लगी थी ऐसा लग रहा था हम बदलो के ऊपर बैठे है। यहाँ पर भी दुकाने अभी लग रही थी ।खाना तो अभी नही बन रहा था पर चाय मिल रही थी तो दुकान वाले से चाय बनवाई तब तक जीजा जी भी आ गए । उनको घुटने में अब ज्यादा तकलीफ हो रही थी उनको आगे का रास्ता दिखाया जो काली घाटी से भीम तलाई तक एकदम नीचे उतरता है।तो वो बोले मैं आगे नही जा पाऊंगा। वैसे काली घाटी से भी शिला के दर्शन होते  है पर आज बादल थे इस लिए दर्शन नही हुए । जीजा जी को बोला आप यही रुको कल सुबह दर्शन करके वापिस चले जाना तो वो थोड़े भाबुक हो गए ।थोड़ी देर रुक कर जीजा जी को वही छोड़ कर हम चारो आगे चल पड़े ।काली घाटी के बाद एकदम नीचे उतरना पड़ा। एकदम सीधी डलहान उतरते हुए हम सोच रहे थे इस पर चड़ेगे कैसे । पूरे रास्ते मे पथर थे इस लिए थोड़ी मुश्किल हो रही थी ।ये डलहान ज्यादा देर नही रहती ऐसी उतराई दो तीन बार आती है ।थोड़ी देर बाद रास्ता ठीक हो गया इस बार जोशी सब से आगे चल रहा था हम तीनों काफी पीछे रह गए थे कारण हम रास्ते मे फ़ोटो लेते हुए जा रहे थे।अगर ऐसी जगह पर फ़ोटो नही खींचेगे तो वहाँ जाने का फायदा ही क्या ।फ़ोटो खीचने का जिम्मा अक्षय भाई का था और हमारा खिंचवाने का ।
काली घाटी के बाद पानी की कोई दिक्कत नही आती छोटे बड़े झरने आते रहते हैं ।एक बड़े झरने के पास हम आराम करने के लिए रुक गए जोशी भी यही बैठा था । हमारे पहुचते ही वो आगे चल पड़ा। हम ने रुक कर सब से पहले कुछ फोटो खींचे फिर थोड़ा रसना और जलजीरा बना कर पिया और बोलत में पानी भर कर आगे बड़ गए। मौसम सुबह से ही बडिया था ।भीम तलाई पर हम रुके नही अभी थोड़ी देर पहले तो आराम किया था तो सोचा अब कुंशा जा कर ही आराम करेगे । हम तीनों आराम से कुदरत के नजारो को देखते हुए चल रहे थे और सोच रहे थे हम कितने खुशनसीब है जो इन पहाड़ो,झरनों, फूलों और पेड़ ,पौधों को इतने करीब से देख रहे हैं अगर कुदरत के इन नजारो को करीब से देखना है तो कुछ कठनाईयों का सामना तो करना ही पड़ेगा । जोशी जी को ज्यादा ही जोश आ गया लगता था वो काफी आगे निकल गए थे। झरने पर जब वो मिले थे तो उनको बोला था भीम द्वारी पर जो सबसे पहली दुकान आएगी वहाँ रुक जाना इस लिए हम तीनों आराम से मजे लेते हुए चल रहे थे ।हमे पता था जोशी खाना बनवा लेगा अगर हम लेट भी हो गए । कुंशा पहुच कर दिल खुश हो गया नजारे ही कुछ ऐसे थे चारो तरफ घास थी वो भी हरी भरी कई तरह के छोटे छोटे  फुल भी खिले हुए थे । यहाँ पर भी थोड़ा फोटो शूट हुआ ।अक्षय का  तो जहाँ से जाने के लिए मन ही नही कर रहा था।पर जाना तो था ही।यहाँ भी कुछ दुकाने लग रही थी अभी कुछ दिनों बाद जहाँ पर भी खाना और रहने की जगह मिलने लगेगी । कुंशा के बाद हम ज्यादा नही रुके बस एक जगह रुक कर घर पर फ़ोन किए सारे रास्ते मे अभी तक bsnl और jio का नेटवर्क मिल रहा था airtel का बहुत कम मिला। यहाँ से जब हम आगे चल रहे थे तो एक पहाड़ी बच्चा मिला उसका नाम  रोहित था । उसने बताया  उसके चाचा और दादी ने भीम द्वारी में दुकान लगा रखी है। वो यहाँ ग्राहक ढूंढने के लिए बैठा था। यही से वो यात्रियों को अपनी दुकान पर रहने के लिए ले जाता है। वो भी हमारे साथ चलने लगा।हम उस से आगे के रास्ते की जानकारी लेने लगे उसने बताया वो भी कल नैनसरोवर तक नहाने जाएगा।
 हम उसके साथ बाते करते हुए चलते रहे ।अब हमें भीम द्वारी तो दिखने लगा था पर जोशी कहीं नही दिख रहा था। थोड़ा अंधेरा भी होने लगा था ।थोड़ी देर बाद हम रोहित के चाचा की दुकान पर पहुच गए वहाँ पर पता किया जोशी के बारे मे तो उन्होंने बताया वो आगे चला गया है। हमने जोर जोर से आवाज़े भी लगाई पर जोशी नही मिला । करीब आधा किलोमीटर दूर हमे कुछ औऱ टेंट दिखे हमे लगा जोशी वहाँ पर होगा हम भी उसी तरफ चल पड़े । वहाँ पहुच कर एक दुकान वाले से पता किया उसने बताया आप का साथी तो पार्वती बाग चला गया है हमे बहुत गुस्सा आया जब उसे बोला था भीम द्वारी रुकना तो वो आगे कैसे जा सकता है ग्रुप में अगर कोई बात हो गई तो उसे सभी को मानना चाहिए ।पर अब अंधेरा काफी हो गया था और थकावट भी हो रही थी तो हमने यही रुकने का मन बना लिया ।एक अच्छी सी जगह देख कर हमने अपना टेण्ट लगा लिया और सामान रख कर दुकान में कुछ खाने के लिए चल पड़े ।दुकान वाले को मैगी बनाने का बोल कर हम उसकी दुकान में रखी रजाई में घुस गए ।ठण्ड काफी हो गई थी ।पहले मैगी खाई फिर चाय पी।थोड़ी देर दुकान वाले से बाते करते रहे थोड़ी जानकारी आगे के रास्ते की भी ली। बैठे बैठे अक्षय भाई ने टेंट वाले से एक रजाई मांग ली टेंट वाले ने बोल दिया ले लो पर किराया 100 रु बताया पर 50 रु में मान गया।दुकान वाले से  पूछा सुबह चाय मिल जाएगी 4 बजे । बोला दे दूंगा मगर आप उठा देना सुबह ।उसके बाद हम अपने टेंट में आ गए रजाई को हमने नीचे बिछाया ता के नींद अच्छी आ जाए और नीचे से ठंड भी कम लगे। और हमने सुबह साथ एक बैग ही लेकर जाने की सोची थोड़ा सा खाना और टोर्च वगैरा एक बैग में रखे बाकी को यही छोड़ देंगे ।सुबह जल्दी जाना था आगे इस लिए सुबह 3 बजे का अलार्म लगा कर हम  स्लीपिंग बैग में घुस कर सो गए ।

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काली घाटी में माँ काली का मंदिर
एक सेल्फी भी हो जाए
हम भी सैल्फी लेंगे

Thursday, 19 July 2018

श्रीखंड कैलाश यात्रा ।भाग-1 संगरूर से थाचडू तक

नमस्कार दोस्तो मैं रुपिंदर शर्मा संगरूर पंजाब से हूँ ।मुझे पहाड़ बचपन से ही बहुत अच्छे लगते हैं और जैसे जैसे उम्र बढ़ती गई पहाड़ो से प्यार भी बढ़ता गया । वैसे तो मैं पहाड़ो पर काफी घुमा हूँ पर आज मैं अपनी श्रीखंड कैलाश यात्रा के कुछ अनुभव आप के साथ सांझा करूँगा । श्रीखंड महादेव की यात्रा काफी कठिन मानी जाती है तो इसकी तैयारी भी बहुत करनी पड़ती है मतलब सैर वगैरा । तो मैंने भी सुबह 4:30 का अलार्म सेट कर दिया और घर पर बोल दिया कल से मैं रोज सुबह सैर करने जाऊंगा। अलार्म अपने तय समय पर रोज बजता । मैं पहले 4 दिन तो  सैर पर गया क्योकि नया नया जोश था पर उसके बाद ना तो मैंने अलार्म बन्द किया न सैर की । लेकिन कोशिश हर रोज करता के कल पक्का जाऊंगा पर गया  कभी नही ।हाँ इस चक्कर मे पत्नी और माता जी से रोज लेक्चर सुनता ।पत्नी जी ने तो बोल दिया जा तो सैर पर जाओ नही अलार्म तो बन्द करदो इसकी वजह से मुझे रोज जल्दी उठना पड़ता है ।पता नही क्या चक्कर था मुझे कभी अलार्म सुनता ही नही था अगर सुनता ही नही है तो उठू भी कैसे।
वैसे यात्रा की ये तयारी पूरा साल चलती रही इस यात्रा पर मेरे साथ जाने वाले मेरे 4 साथी थे। उनमें से बब्बू और अक्षय दोनो तो शुरू से तैयार थे बाकी दो एक मेरे जीजा जी और एक चंडीगढ़ से शंकर जोशी यात्रा से कुछ दिन पहले तैयार हुए थे ।यात्रा जितनी कठिन है उससे कहीं ज्यादा कठिन इसे हमने बना दिया था । हमने सोचा जब यात्रा आधिकारिक तौर पर शुरू होगी तो भीड़ बहुत होगी और सावन में बारिश का भी बहुत चक्कर पड़ता है तो हम ने फैसला किया यात्रा को पहले किया जाए और जो भी जरूरत का सामान हो उसको खुद लेकर जायेगे खुद लेकर जाने का मतलब कोई पोटर भी नही करना ।
तो जाने से पहले सामान और ट्रैक की जानकारी इकठ्ठी करनी शुरू की सामान में स्लीपिंग बैग और टेंट खरीदे गये और खाने में बिस्किट नमकीन और घर पर बनी मट्ठी और गुलगुले पैक किए गए । कुछ मैग्गी भी रख ली और उसे बनाने के लिए एक बर्तन रख लिया । मैगी आग के बिना तो बनेगी नही इस लिए फ्यूल जैली ले ली । और ट्रैक की जानकारी के लिए जाट देवता जी के श्रीखंड यात्रा के ब्लॉग को 10,15 बार पड़ लिया गया।यात्रा से कुछ दिन पहले अक्षय जाट देवता जी से मिला था उन्होंने अक्षय भाई को बोला भी था जब यात्रा में लंगर लगेंगे तब जाओ आसानी होगी पर हम तो बस एक बात पर अड़े थे भीड़ में नही जाना है ।  यात्रा का दिन भी नजदीक आ गया तो पैकिंग शुरू कर दी जब सब साथियो से पूछा आप के बैग का बजन कितना है तो जीजा जी के बैग का बजन 11 किलो सब से ज्यादा था और मेरा 6 किलो सब से कम था ।मेरे में कम इस लिए था मैंने सिर्फ रेन कोट और एक पेन्ट शर्ट रखे थे एक जैकेट और एक इनर ज्यादा सामान चड़ाई में तंग करता है । इस के इलावा स्लीपिंग बैग थे  ये सभी के पिट्ठू बैग से अलग थे । टेंट को हम मिल बांट कर उठाने वाले थे।और थोड़ा बहुत खाने के सामान था ।
इन सब के बीच जाने का दिन 16 जून भी आ गया  । सब साथियो ने चंडीगढ़ बस स्टैंड में इकठा होना था । शाम 7 बजे की बस थी चंडीगड़ से रामपुर की। मैं बब्बू और जीजा जी संगरूर से दोपहर 3 बजे चल पड़े। अक्षय ने लालड़ू हरयाणा से आना था जो चंडीगड़ के पास में ही है। हम तीनों 6:15 पर चंडीगड़ बस स्टैंड पहुंच गए थोड़ी देर बाद अक्षय भी आ गया। तभी बहुत तेज बारिश शुरू हो गई पहले काफी गर्मी थी अब बारिश की वजह से ठंड हो गई थी। शंकर जोशी को फ़ोन किया तो वो एक दोस्त के साथ गाड़ी में आ रहा था ।  हमारी सब की बस टिकट पहले से ही बुक थी तो अक्षय और बब्बू ये पता करने चले गए के बस कौन से काउंटर पर आ रही है। उन्होंने हमें आ कर बताया बस 29 नंबर पर आएगी पर जब 7 बजने में 5 मिन्ट रह गए और बस काउंटर पर नही आई तो हमने दुबारा पता किया तो पता चला बस तो 26 नम्बर पर लगी हैं। हमारे बस में बैठते ही बस चल पड़ी अगर 2 मिनट और लेट हो जाते तो बस निकल जाती बस तो चलो 8 बजे वाली भी आ जाती पर टिकट के पैसे नहीं आने थे । बारिश की वजह से मौसम में ठंडक आ गई थी तो बस में कोई ज्यादा परेशानी नही हुई
रास्ते मे बस खाने के लिए ढाबे पर रुकती है । हमारा खाना तो अक्षय भाई घर से पैक करवा कर लाये थे अरबी की सब्जी और परांठे सभी ने बस में बैठ कर ही खा लिए ।सब्जी बहुत टेस्टी बनी थी फिर कभी दुबारा मौका देंगे अक्षय जी को खाना खिलाने का ।जब सभी सवारियां खाना खा कर बस में आ गई तो बस दुबारा चल पड़ी । सभी को नींद तो आ रही थी पर लगातार लग रहे झटके तंग कर रहे थे । मुझे और  बब्बू को तो वैसे भी बस में नींद नही आती । जब बस शिमला से आगे गयी  तो एकदम से ठंड बहुत बढ़ गयी इतनी ठण्ड तो हमे श्रीखंड शिला के पास नही लगी जितनी बस में लग रही थी तो जल्दी जल्दी बैग में से जैकेट निकाली गई तो कुछ गर्माहट मिली। शिमला में बस आधी खाली भी हो गई थी तो हम सभी खाली सीटो पर लेट गए ।थोड़ी देर बाद जीजा जी को बाथरूम आया तो मैंने उनको एक खाली बोतल दी और कहा बस की लास्ट सीट पर जाकर काम निपटा लो और उन्होनो ने बात मान ली।  कोशिश तो बहुत की सोने की पर नींद आ ही नही रही थी तो  मैं और बब्बू बाते करने लगें ।कुछ देर बाद कंडक्टर ने आवाज लगा दी रामपुर वाले तैयार हो जाओ बस स्टैंड आने वाला है । तो हम सभी अपना सामान इकठा करने लगे बस स्टैंड पर उतर कर हम ने सब से पहले जाओ को जाने वाली बस का पता किया वो 8 बजे के बाद आने वाली थी। अभी समय बहुत था हमारे पास तो हम सामान को एक तरफ रख कर आराम करने लगे ।इतने में सफाई करने वाले आ गए और हमे समान उठाने को बोलने लगे तो हमने अपना सामान उठा कर साइड में किया । अब सोचा सो कर क्या करेंगे ।और बारी बारी से फ्रेश  होने के लिए शौचालय में चले गए ।अभी भी बस के आने में बहुत समय था तो हमने सोचा टैक्सी कर लेते हैं। एक दो टैक्सी वालो से पता किया एक टैक्सी वाले ने 1500 रुपये मांगे बस के किराये से तो बहुत ज्यादा थे पर अगर समय को देखे तो बस के मुकाबले  बहुत जल्दी जाओं  पहुंच जाते । सलाह मशविरा करने पर सब टैक्सी से जाने को मान गए  अगर बस से जाते तो 1 बजे से पहले यात्रा शुरू नही कर सकते थे टैक्सी से हम 8 बजे के करीब  ही जाओं पहुंच गए। वैसे रामपुर से जाओं तक सुरु में थोड़ा खराब है फिर बडिया सड़क आ जाती है ।रामपुर से जब सतलुज को पार करके दूसरी तरफ जाते है तो हम कुल्लू जिला  में पहुंच जाते है।रास्ते मे  सेब के पेड़ बहुत दिखते है अभी सेब छोटे थे डेड महीने के बाद पक्केगे ये ।जाओं पहुंच कर हम यात्रा शुरू करने से पहले  कुछ खाना चाहते थे। इस लिए  एक चाय की दुकान पर रुक गए खाने के बारे में पता किया तो वो बोला में बना दूंगा परांठे ।उसको 5 चाय और 10 आलू के परांठो का ऑडर दिया चाय तो उस ने दुकान पर ही बना दी पर परांठे के लिए अपने घर पर फ़ोन कर दिया ।हमने जब चाय पीने के कई सौ सालों के बाद परांठो के बारे में पूछा तो बोला अभी थोड़ा और समय लगेगा ।इतने समय मे तो दुबारा अपने घर जाकर खा आते खाना।हमे बहुत गुस्सा आ रहा था पर अब क्या कर सकते थे तो मैंने बब्बू और अक्षय को बोला आप परांठे ले कर आ जाना अब बराटी नाले पर जा कर ही खायेगे। तब तक मैं, जीजा जी और शंकर जोशी चलते हैं तो हम तीनों चल पड़े भोले बाबा के दर्शन करने के लिए सब से पहले एक पुल पार करना पड़ता है। शुरुआत में चढ़ाई ज्यादा नही है आराम से चलते रहे अक्षय और बब्बू पीछे थे इस लिए भी जल्दी नही की ।मैं सबसे आगे चल रहा था थोड़ी देर बाद याद आया पानी तो लिया ही नही इस लिए काफी देर प्यासा ही रहना पड़ा पर रास्ते मे एक जगह पानी का एक छोटा जा नाला मिला वहाँ पानी पिया ।थोड़ी देर बाद सिंघहार्ड नामक  जगह आई जहा यात्रा के समय रजिस्ट्रेशन होती है पर अब ये जगह बिल्कुल सुनसान थी यहाँ पर कमरे बने हुए हैं।और एक बड़ा सा शेड बना है यहाँ पर कुछ लोग लंगर लगाने के लिए तयारी कर रहे थे।यहाँ शंकर जी की मूर्ति भी बनी है उनको नमस्कार किया और फिर आगे चल दिया ।जीजा जी और जोशी जी पीछे आ रहे थे ।थोड़ी देर बाद वो जगह आई जहाँ आगे जाने के लिए लेंटर डाल कर रास्ता बनाया हुआ है इसको भी पार कर लिया ।अब  हल्की बूंदाबांदी  होनी शुरू हो गई तभी बाकी चारो भी आ गए ।हल्की बारिश हो रही थी तो  रेनकोट पहन लिए ओर फिर आगे की ओर चल पड़े।
 थोड़ा चलने पर हमें लोहे की सीढ़ियां दिखाई दी नीचे की ओर उतरती हुई । हम सीढ़िया उतरने लगे और उतरते ही बराटी नाले पर बना बाबा जी का आश्रम आ गया हमारे आश्रम पहुचते ही बारिश तेज हो गई । हमने अपने सामान को साइड में रखा और बाबा जी से खाने के बारे में पता करने लगे लंगर अभी तयार नही था पर चाय मिल गयी और हमारे पास आलू के परांठे तो थे ही। सभी ने 2 -2 परांठे ले लिए पर जब खाने लगे तो लाख कोशिश करने पर भी परांठो में से आलू नही मिले हाँ पर जीजा जी को एक मिर्च का टुकड़ा जरूर मिल गया ।पर जैसे भी थे परांठे खा कर भूख को शांत किया अभी तक सुबह से कुछ भी नही खाया था सिर्फ एक एक कप चाय पी थी।अब बारिश भी रुक गई थी तो चल दिये आगे की और बराटी नाले के बाद चढ़ाई भी शुरू हो जाती है वैसे मुझे चड़ाई में कोई खास दिकत नही होती है पर उतरते समय बहुत मुश्किल होती है । अक्षय बब्बू और जोशी आगे चल रहे थे मैं ओर जीजा जी पीछे हमारे सभी के पास करीब करीब12 किलो वजन सभी के पास था चड़ाई ज्यादा और पानी सिर्फ 3 लीटर के करीब जैसे जैसे चड़ाई चढ़ते गए जीजा जी पीछे रहते गए जब वो काफी पीछे रह जाते थे तो हम चारो एक जगह रुक कर जोर जोर से जीजा जी को आवाज लगाते इससे हमें पता चलता रहता के वो पीछे आ रहे हैं। कई बार जब हम आवाज लगते तो वो कोई जवाब नही देते थे तो जब वो पास आए तो हम नहे कहा जवाब तो दे दिया करो ता के हमे पता चलता रहे आप आ रहे हो तो वो बोले इतनी चड़ाई पर सांस बड़ी मुश्किल से ले रहा हूँ आवाज कहा से मरूँगा तुम लोग चलते रहो मैं आ जाऊंगा। इस चड़ाई पर हमने देखा पानी की लोहे की पाईप तो बिछाई हुई है पर उसमे पानी नही था अगर पाईप है तो रास्ते मे टोंटी लगा कर पानी की सप्लाई भी होनी चाहिये थी ता के यात्रियों को पानी की कमी ना हो । अब जीजा जी काफी पीछे रहने लगे थे उनके एक घुटने में तो पहले से ही प्रॉब्लम थी इस चड़ाई ने और दिक्कत शुरू कर दी अब अक्षय ,बब्बू और जोशी को आगे जाने को बोल कर मैं रुक गया और जीजा जी का इंतजार करने लगा 20 मिनट के बाद वो आ गए अब मुझे लगा ये वजन उठा कर ज्यादा नही चल सकते तो इनका बैग भी मैंने उठा लिया । अब मेरे पास 25 किलो से ज्यादा वजन था । अब इतना वजन था तो मेरी स्पीड भी कम हो गयी थी। हम दोनों आराम से चल रहे थे बीच बीच मे अक्षय और बब्बू को आवाज़ लगा कर बता देता था कि हम आ रहे हैं । रास्ते मे एक जगह जोशी बैठा था उसको मैंने थाचडू में टेंट लगाने का बोल कर आगे भेज दिया थोड़ी देर बाद जीजा जी भी आ गए । यहाँ पर बैठ कर थोड़ा आराम किया भूख लग रही थी तो बिस्किट खाये। जो लोग इस यात्रा पर गए है उनको ही पता है ये चड़ाई इंसान का क्या हाल करती है घोड़े और खच्चर बच गए जो इस यात्रा में नही होते नही तो वो भाग जाते ऐसी चड़ाई देख कर । अब फिर से चलना शुरू किया वजन ज्यादा होने से थोड़ा रुक रुक कर चल रहे थे । रास्ते मे आते जाते भी सिर्फ कभी कभी लोकल लोग मिल रहे थे वो भी अभी दुकानों के लिए समान ले कर जा रहे थे । अब तो हल्का हल्का अंधेरा भी होने लगा था अब आवाज़ लगाने पर बब्बू और अक्षय का भी कोई जवाब नही आता था । वो काफी आगे निकल गए थे ।अब 4 घंटे से ज्यादा हो गया था जीजा जी का सामान उठाए हुए अब उनको उनका सामान वापिस किया तो थोड़ा हल्का महसूस हुआ। आधा घंटा और चलने पर हमे कुछ टेंट लगे नजर आए आवाज़ देने पर बब्बू टेंट से बाहर आ गया जब वो नजर आया चलने की गति और कम हो गई पता था अब तो पहुंच ही गये है। 5 मिनट का रास्ता 15 मिनट में बड़ी मुश्किल से तय किया।किसी दुकान वाले ने एक बड़ा सा टेन्ट लगा कर खाली छोड़ रखा था इसी के अंदर हमारे तीन टेंट लगा रखे थे इन्होंने। जाते ही समान फैंका और टेंट में घुस गए सब से पहले गिले कपड़े बदले। बारिश से नही पसीने से गीले हुए थे। गीले कपड़े बाहर रख दिये बड़ा टेंट तो था बाहर इस लिए बारिश का डर नही था और रात भर में हवा से सुख भी जाएंगे । अब बारी आई खाने की तो जो घर से गुलगुले और मठियाँ लाये थे उन्ही से काम चलाया गया मैगी कल बना लेंगे आज हिम्मत नही है।जो पानी नीचे से लाए थे वो तो खत्म हो गया था सारा पानी जीजा जी पी गए थे ।बब्बू ने बताया यहाँ पानी की बाल्टी पड़ी है पर उसको कुत्ते ने जूठा कर दिया है दरसल एक कुत्ता जाओं से ही हमारे साथ आ रहा था। थोड़ा खाना इसे भी दिया गया ।रात को बिना पानी पिएं ही सो गए।
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     बराटी नाले के पास खिची गयी थी
        थाचडू की चड़ाई पर कही
     सिंघहार्ड में शंकर जी की मूर्ति
        थाचडू की चड़ाई पर कही

        थोड़ा आराम भी जरूरी है



नीचे अक्षय सेल्फी लेते हुए बब्बू सफ़ेद टीशर्ट में टोपीवाले शंकर जोशी नीली टीशर्ट में मैं और पीली टीशर्ट में जीजा जी